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क्या ढोंगी बाबाओं की यह अंतिम कड़ी है ?

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बाबूलाल नागा

 

देश के एक और पाखंडी बाबा के पाप का घड़ा फूट पड़ा। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक साध्वी से रेप का दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई गई है। पर सवाल यह है कि क्या राम रहीम प्रकरण ढोंगी बाबाओं की अंतिम कड़ी है। बेशक नहीं। क्योंकि आज सवाल एक राम रहीम जैसे बाबा का नहीं है बल्कि उन सभी बाबाओं का है जो धर्म के नाम पर गोरखधंधा कर रहे हैं।

देश में राम रहीम जैसे कई पाखंडी बाबाओं और धर्मगुरूओं की बाढ़ आई हुई है। जो जितना बड़ा साधु संत या बाबा बनकर उभरता है, थोड़े दिनों बाद उसकी काली करतूतों का लंबा चौड़ा पिटारा खुलकर सामने आ जाता है। इनके पास करोड़ों की संपत्ति देश-विदेश में बन जाती है। राम, कृष्ण का जाप करके भक्ति का पाठ पढ़ाने वाले ये ढोंगी बाबा लोगों को उल्लू बनाने से बाज नहीं आते। कहते हैं ईश्वर हमारे काफी करीब है। हम दिन रात ईश्वर से साक्षात्कार करते हैं। हम साक्षात् ईश्वर के दर्शन करते हैं। सोचने वाली बात है कि जो बाबा अपनी ही भलाई में लगा हुआ है, वह भक्तजनों का भला कैसे कर सकता है? इन्होंने तो आस्था को एक बिजनेस बना लिया है। ये तो वे भारतीय संत हैं जो धर्म की आड़ में करोड़ों की संपत्ति बनाकर मजे करते हैं। बीत जमाने में भी बाबा हुआ करते थे। कबीर, गुरूनानक ने कभी भव्य महल नहीं बनाए। न किसी सिंहासन, न किसी लग्जरी कार की जरूरत उन्हें पड़ी। उनका एक ही काम था लोगों को ज्ञान देना लेकिन आज के इन धूर्त बाबाओं के क्या कहने। इनको बैठने के लिए भव्य सिंहासन चाहिए। घूमने के लिए लंबी गाड़ी चाहिए। मुगल बादशाहों की तरह इन्होंने अपने आश्रम बना रखे हैं और उन्हीं आश्रमों में गलत काम करने से बाज नहीं आते। ये बाबा लोग खुद मोहमाया में लिपटे हुए हैं और अपने भक्तजनों को शिक्षा दे रहे हैं कि मोहमाया से दूर रहो। इसके जाल में मत फंसो। सेक्स से दूर रहने की सलाह देने वाले आज स्वयं ही सेक्स स्कैंडल में पकड़े जा रहे हैं।

देश के लगभग हर गांव कस्बे में आए दिन ऐसे पाखंडी बाबाओं की पोल खुलती रहती है। ऐसे चरित्रहीन बाबाओं का पर्दाफाश होता रहता है। स्वामी नित्यानंद एक तमिल अभिनेत्री के साथ आपत्तिजनक हालत में पकड़े जाते हैं तो अपने आप को इच्छाधारी बाबा कहने वाले स्वामी भीमानंद सेक्स रैकट चलाते हुए। आसाराम पर एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगता है। कृपालु महाराज के यौनशोषण से जुड़े किस्से सुर्खियों में रहे तो समोसे, पकौड़ी और रसगुल्ले से इलाज करने वाले निर्मल बाबा का भी पर्दाफाश होते देर न लगी। हैरानी की बात यह है कि इतनी जागरूकता होने के बाद भी ढोंगियों और दुष्चरित्र बाबाओं का चलन घटने की बजाए बढ़ता जा रहा है। इसका क्या अर्थ है? दरअसल हमारा देश बेहद धर्मप्रिय देश है। यहां पर श्रद्धा के नाम पर लोग कुछ भी करने को तैयार हो जाते हैं। धार्मिकता का नशा इन भक्तों पर सिर चढ़कर बोलता है। जनता आंख मूंदकर विश्वास कर लेती है। भक्त लोग तुरंत श्रृद्धा में बलिहारी हो जाते हैं। बाबाओं के संग झूमने लगते हैं। उनको सर आंखों पर बैठा लेते हैं। इसकी वजह से ऐसे पापी लोग जनता के बीच तेजी से स्थापित हो रहे हैं। दूसरी तरफ ऐसे बाबाओं की सांठगांठ राजनीतिक पार्टियों, नेताओं, अफसरों, उद्योगपतियों व समाजसेवियों से भी होती है। इस सांठगांठ का फायदा ये बाबा लोग अक्सर उठाते रहते हैं। इसलिए इनके विरुद्ध कभी कोई कार्यवाही नहीं होती।

आज राम रहीम की करतूतें सामने आई हैं। कल इसी तरह और धूर्त बाबाओं की करतूतें सामने आएंगी। जनता का गुस्सा फूटेगा, लोगां की आस्था टूटेगी, पुलिस की पकड़ में वे आएंगे, उन्हें सजा भी मिल जाएगी लेकिन क्या गारंटी है कि ये सब आइंदा नहीं होगा। केवल ऐसे धूर्त बाबाओं पर ही कार्रवाई क्यों? उन सब को भी कड़ी सजा मिलनी चाहिए जो इन ढोंगी बाबाओं के संग खड़े रहते हैं। उनकी काली करतूतों को जानते हुए भी उनके आश्रमों के लिए जमीनें देते हैं। श्रृद्धा के नाम पर जो बढ़चढ़कर चढ़ाव देते हैं। बेशक अब धर्म के नाम पर देह व्यापार की आड़ में अपराध करने वाले ऐसे बाबाओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जरूरत है। जरूरत है एक निर्णायक सामाजिक जागरूकता की।

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