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गीतांजली हॉस्पीटल की टाइल्सों को हटाने की मांग के पीछे राज क्या है ?

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रात की 12 बजने आए है। अभी एक खबर आई, इस खबर ने मुझे लक्ष्य से भटका दिया है। खबर के अनुसार कुछ उदयपुर की ब्राह्मण युवजन सभा के बैनर तले कुछ युवा व अधेड़ लोगों ने संभागीय आयुक्त को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि उदयपुर शहर के निजी प्रतिष्ठानों के भवनों की सीढ़ियों में लगी उन टाइल्सों को हटाया जाए जिनमें विभिन्न देवी-देवताओं के चित्रयुक्त टाइल्सें लगी हुई है।

सभा के लोगों का सीधा-सीधा कहना है कि उदयपुर शहर के एकलिंगपुरा स्थित गीतांजली हॉस्पीटल में लगी देवी-देवताओं की चित्रित टाइल्सों को हटाया जाए। हिन्दू धर्म के शिखर समुदाय माने जाने वाले ब्राह्मण समाज के युवजन संगठन द्वारा उठाई गई यह मांग उनकी नजर में सही हो सकती है लेकिन इस मांग के पीछे कारण कोई ओर ही नजर आता है। अगर ओर कोई कारण नहीं होता तो यह संगठन कंकूपत्री पत्र देवी-देवताओं के नाम व फोटो छापने को बंद करवाने की मांग करता नजर आता। हम सभी जानते है कि कंकूपत्री में देवी-देवताओं नाम लिखे जाते है, उनके फोटो छापे जाते है। शादी-समारोह होने के बाद वह कंकूपत्री कहां-कहां मिलती है, यह बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हम सब अच्छे से जानते है। गांव, कस्बे व शहर में जहां भयंकर गंदगी होगी वहां कंकूपत्री पड़ी दिख जाती है। किताबों में, पोस्टरों में व अखबारों सहित कई प्रकार के प्रकाशनों में देवी-देवताओं के चित्र छपते है और बाद में उन पन्नों पर कहीं गांव की महिलाएं बच्चों का गू फैंकती नजर आती है, कहीं लोग उन पन्नों में पोहे-जलेबी का नाश्ता करते नजर आते है। कई लोग उनसे अपनी महंगी गाड़ियों के शीशे साफ करते पाए जाते है। हम सब इन कृत्यों में शामिल है। अर्थात् स्पष्ट है कि हम सभी हिन्दू धर्म को मानने वाले कथित हिन्दू, हिन्दू देवी-देवताओं के चित्रों का अपमान करते है या यूं कहे है कि तवज्जों नहीं देते है।

अब बात करते है गीतांजली हॉस्पीटल में लगी टाइल्स की। सीढ़ियों की दिवार पर टाइल्सें लगी ह ुई। कुछ-कुछ टाइल्सों में विभिन्न धर्मों के देवी-देवताओं व प्रतीकों के चित्र छपे हुए है। जहां तक अनुमान है, सीढ़ियों पर यह टाइल्सें इसलिए लगाई गई है ताकि पान, गुटखें खाने वाले लोग सीढ़ियां चढ़ते वक्त दिवारों पर ना थूके और दिवारें गंदी ना हो। और यह आइडिया सही भी शाबित हुआ है। सरकारी कार्यालयों, सरकारी अस्पताल भवन की सीढ़ियों के कोनों में देखिए आप, गुटखें खाकर थूकने से उनकी दशा ऐसी हो गई कि वहां से नाक और आंखें बंद करके चढ़ना पड़ता है। कुल मिलाकर सार यह है कि देवी-देवताओं व धार्मिक प्रतीक छपी टाइल्स लगाने से गीतांजली हॉस्पीटल की सीढ़ियों पर गंदगी नहीं है, साफ सफाई दिखाई देती है।

मान भी लिया जाए कि लोग गणेश जी मूर्ति को छू रहे होंगे या कोई लक्ष्मी जी की मूर्ति को गंदा कर रहा होगा तो भी सवाल यह उठता है कि युवजन सभा को केवल मात्र भवन ही नजर आए ? और वो भी प्रमुखता से गीतांजली हॉस्पीटल का। युवजन सभा को इन भवनों की सीढ़ियों की दिवारों में लगी टाइल्सों को हटवाने की बजाए लोगों की मानसिकता को बदलने पर काम करना चाहिए। क्योंकि अभी तो साफ जाहिर है कि टाइल्स हटवाने के पीछे राज कुछ ओर है।

और वैसे भी गणेश जी, लक्ष्मी जी, विष्णु जी, ब्रह्मा जी आदि देवी-देवताओं के चित्रों पर अगर कोई थूंकने या उन्हें गंदा करने का पाप करेगा तो एक इंसान की क्या बिसात की वो उस अपराधी को सजा देगा या देवी-देवताओं को थूंक या गंदा होने से बचायेगा! वो साक्षात् ईश्वर जिन्होंने रावण, कंस सहित बड़े-बड़े पापियों को नाश कर दिया। क्या वे इन थूकने वाले और उनकी तस्वीरों को गंदा कर देने वाले पापियों को ठीक नहीं कर सकेंगे ?

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