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छोटे शहर की देसी लव स्टोरी “बेबीगर्ल“

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निर्देशक निशांत भारद्वाज का “बेबीगर्ल“ यू ट्यूब पर मचा रहा है धूम

जेताराम परिहार

नदी के बहाव में यदि ताक़त हो तो हज़ारों बाधाओं के बावजूद भी वो अपना रास्ता बना ही लेती है। ये कहावत आज की युवा पीढी पर खरी उतरती है। एक समय था जब गाने सुनने के लिए लोग रेडियो कान के चिपकाये गली मौहल्ले में बड़ी शान से घूमते थे। जब कभी क्रिकेट की कॉमेंट्री आती तो उनके भाव बढ़ जाते थे। युवा मजनू अपनी लैला को इम्प्रेस करने के लिए अक्सर छोटे शहरों में रेडियो के साथ लड़की के घर के इर्द गिर्द इतराते मिल ही जाते थे। उस दौर का हर युवा अपने दौर के हर संगीतकार और गायक को जानता था जबकि 60 प्रतिशत लोगों की सिनेमा तक पहुँच नहीं थी। क्योंकि गाँवों की संस्कृति में उन दिनों सिनेमा देखना अच्छा लक्षण नहीं माना जाता था तो फिर गांव को वो युवक संगीत निर्देशक और गायक के बारे में कैसे जानता था। वो इसलिए की तब रेडियो पर बजने वाले हर गाने के साथ साथ रेडियो जॉकी ये कहता था। उदाहरण के तौर पर जैसे की “पेश है मुकेश की आवाज़ में अगला नगमा, इस गाने के गीतकार शैलेन्द्र है और संगीत है जयदेव का।“

समय बदला रेडियो की जगह सीडी डीवीडी ने ली जिस पर तो सब लिखा ही होता था। पर अब जब सीडी डीवीडी का दौर ख़त्म हो गया और रेडियो पुनर्जीवित हुवा तो बड़ी विचित्र बात देखने में आई। इस दौर में यानी की आज के दौर में हर चीज़ हीरो हीरोइन के नाम से जाने लगी। मसलन अब आपको सुनवाते है फिल्म दिलवाले से शाहरुख़ खान का गाना। बाकी सब गौण। संगीत निर्देशक, गायक, फिल्म निर्देशक, नृत्य निर्देशक सब शाहरुख़। ऐसे में संगीत के क्षेत्र में रूचि रखने वाले आज के युवा संगीत निर्देशक को अपनी पहचान बनाये रखने के लिए अन्य तरीकों को ईजाद पड़ा। म्यूज़िक कंपनियों की बड़े गायकों उर अभिनेताओं की फिल्मों को ही महत्व देने के कारण। युवा और अच्छे संगीतकारों ने अपनी पहचान बनाने के लिए डिजिटल प्लटफार्म को अपना माध्यम चुना। अच्छा ही हुवा कुछ अच्छे संगीतकार, गायक, गीतकार और निर्देशक देखने और सुनने को मिल रहे है। म्युज़िक कम्पनियों की दादागिरी पर बहुत हद तक अंकुश लगा है।

इसी कड़ी में शीर्ष पर नाम है युवा महिला संगीत निर्देशक रिमी धर। संगीत की आधुनिक और पारंरिक शिक्षा के पश्चात सारेगामा अपनी गायकी का लौहा मनवाने के पश्चात गायिका के रूप में मिल रही प्रचूर लोकप्रियता को त्याग कर संगीत निर्देशक के रूप में अपने आपको स्थापित करने के उनके जूनून ने आज उन्हें दिग्गजों के बीच सम्माननीय स्थान दिलवाया है। रिमी के संगीत में एक अनूठी कशिश होती है। उनका हर गाना आपके दिल को छू लेता है और बार बार सुनने को मन करता है। स्वभाव से खुश मिजाज़, चुलबुली सी सुन्दर कद काठी और गहरी बड़ी बड़ी आँखों वाली खूबसूरत लड़की रिमी से जब उसके मुम्बई स्थित घर पर मुलाक़ात होने से पहले उनके गानों को सुनकर ऐसा लग रहा था की कोई धीर गंभीर स्वभाव की महिला होगी पर जब मिले तो वो अपने संगीत की तरह सदाबहार निकली जिस से बार-बार मिलने को दिल चाहे। आप सोच रहे होंगे की एक संगीत निर्देशिका के बारे में बात करने के लिए मैंने रेडियो के युग से शुरुआत क्यों की? वो इसलिए की कल ही उनका एक गाना “बेबीगर्ल“ यू ट्यूब पर उनके चैनल एल्फिन आईज़ एंटरटेनमेंट पर रिलीज़ हुआ। गाने को देखने के बाद मुझे अपने शहर की यादें ताज़ा हो गयी। छोटे शहर में आधुनिकता और देसी अंदाज़ को सम्मिश्रित करके कही गयी खूबसूरत कहानी है बेबीगर्ल। जिस तरह से रिमी के संगीत में रोचकता और नवीनता है उसी तरह से विडियो में भी निर्देशक निशांत भारद्वाज ने रोचकता को बनाये रखा है। पहनावे से लेकर कलाकारों शांतनु सुरोलिया और रेशमा बारी के अभिनय में भी एक सादगी स्पष्ट दिखाई देती है। बीकानेर की मनोहारी छटा, खेत और उनमे लहलहाती सरसों की फसल।

किरदारों का अल्हड अंदाज़। संगीत की भावुकता भरी चंचलता और अनुभवित निर्देशक का सटीक निर्देशन देख कर मन अनायास ही अपने आपको “वाह“ कहने से नहीं रोक पाता। ध्रुवन गौतम का छायांकन और मन बहादुर रोका का संकलन। सभी नपी तुली और दर्शनीय हैं। मुझे लगता है हम सब को बेबीगर्ल के ज़रिये अपने शहर जाने का अवसर नहीं गवाँना चाहिए। कवर म्यूजिक वीडिओज़ के दौर में ओरजिनल म्यूजिक विडियो का स्वर्णिम अवसर नहीं गवाना चाहिए।

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