आमजन के लिए आमजन द्वारा

​कैसा इतिहास ?

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संग्राम छिडा़ है
हृदय की तंग गलियों में,

इतिहास रचा गया

सबलों की रंगरलियों में।
कोरे पन्ने मसी से

मात्र आवरित किए गए।

सच का घोंटा गला,

राक्षस पूज्य कर दिए गए।
गर्त जिनका था बसेरा ,

सिंहासन पर आसीन हुए।

लहू दे बचाई लाज माँ की,

वो इतिहास में रहे अनछुए।।
फाँसी पर झूले जो लाल,

उनका योगदान भुलाया गया।

चापलूसी में चतर लोगों को,

सिर आँखों पर बिठाया गया।।
सम्मान का आंकलन हुआ,

धनाढ्यपन के पलडे से।

गरीब की मौत रहस्य रही,

अमीर मरा बडे़ धडल्ले से।।
कैसा अतीत उदघाटित हुआ?

मर्म छुपाया गया जमाने से।।

घाव अग्रसर नासूरियत को ,

भर नहीं पायेंगे मल्हम लगाने से।।

– देवकिशन “देवदुर्लभ” 

(25-03-2017)

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