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कला आश्रम आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में काले कारनामें

मेडिकल कॉलेज की मान्यता बचाने के लिए फर्जी तरीके से चल रही है ओपीडी व आईपीडी

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कला आश्रम आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज . . . इस पर कोई सूचना बोर्ड नहीं लगा है।

लखन सालवी/गोगुन्दा/उदयपुर – 13 जुलाई को राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर चोरबावड़ी ग्राम पंचायत क्षेत्र के बांसड़ा गांव के समीप संचालित कला आश्रम आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज के प्रबंधन की धांधली सामने आई। जानकारी के अनुसार 13 जुलाई को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय (जोधपुर) से काय चिकित्सा के विभागाध्यक्ष प्रमोद कुमार मित्रा, रचना शरीर के विभागाध्यक्ष महेन्द्र कुमार शर्मा और राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (जयपुर) के स्वस्थवृत्त के विभागाध्यक्ष कमलेश कुमार शर्मा (विद्यार्थी) सहित एक दल कॉलेज के निरीक्षण के लिए पहुंचा। कॉलेज प्रबंधन ने मीडिया को इस दल से नहीं मिलने दिया गया। वहीं दिन भर कॉलेज के मुख्यद्वार पर ताला लगा रहा, न मीडियाकर्मियों को और ना ही शिविर की सूचना पर वहां आए मरीजों को अंदर जाने दिया गया। दिन भर में सैकड़ों लोग कला आश्रम आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज के बाहर पहुंचे, वहीं कस्बे में यह चर्चा का विषय बना रहा।

उपप्रधान, सरपंच व उपसरंपच को भी मरीजों से नहीं मिलने दिया 

गेट के बाहर खड़े उपप्रधान, सरपंच व उपसरपंच

कई लोग कॉलेज प्रबंधन द्वारा की जा रही धांधली की शिकायतें करने भी पहुंचे लेकिन उन्हें कॉलेज परिसर में नहीं जाने दिया गया। यहां तक कि कला आश्रम में भर्ती मरीजों की तबीयत जानने के लिए पहुंचे गोगुन्दा पंचायत समिति के उपप्रधान पप्पू राणा भील, चोरबावड़ी सरपंच नाहर सिंह देवड़ा व उपसरपंच भारत सिंह को भी अंदर नहीं जाने दिया। सरपंच नाहर सिंह देवड़ा ने बताया कि इस मेडिकल कॉलेज में उनकी ग्राम पंचायत क्षेत्र के 4-5 मरीज भर्ती थे, जानकारी मिलने पर वे उन मरीजों से मिलने के लिए वहां पहुंचे थे लेकिन सुरक्षा गार्ड ने उन्हें आधे घण्टे तक मुख्यद्वार के बाहर खड़ा रखा और मरीजों से नहीं मिलने दिया गया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह कला आश्रम के लोग चोरबावड़ी ग्राम पंचायत क्षेत्र के गांवों में गए थे और लोगों को 100-100 रूपए का लालच देकर काले रंग की बोलेरो गाड़ी में बिठाकर मेडिकल कॉलेज में ले गए थे। निरीक्षण की जानकारी के लिए टीम के सदस्य कमलेश कुमार शर्मा से फोन पर बात की तो उन्होंने निरीक्षण के संबंध में जानकारी देने से इंकार कर दिया।

निरीक्षण से पूर्व लाए जाते है फर्जी मरीज, तीन दिन के लिए की जाती है डॉक्टरों की व्यवस्था
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण के लिए जब भी विश्वविद्यालय की टीम आती है तो उससे पूर्व गांवों से 100-1500 रूपए देने का लालच देकर लोगों को फर्जी मरीज बनाकर आईपीड़ी में लगे बेड़ पर लेटा दिया जाता है। वहीं तीन-चार दिन के लिए आयुर्वेद चिकित्सक भी लगाए जाते है ताकि निरीक्षण टीम को संतुष्ट किया जा सके।

किशोर लाल मेघवाल

चोरबावड़ी के किशोर लाल पिता भैराराम मेघवाल ने बताया कि डेढ़ माह पूर्व कॉलेज में काम करने वाले पप्पू दमामी व चुन्नी लाल काले रंग की बोलेरो में बैठ कर गांव में आए। उन्होंने रोजाना के 100 रूपए देने की बात कह कर कॉलेज में चलने को कहा। उन्होंने कहा कि कॉलेज में बेड पर कम्बल ओढ़कर सोना है। दिन भर सोने रहने के 100 रूपए देंगे। पप्पू दमामी के कहने पर वो मेडिकल कॉलेज में जाने को तैयार हो गया। उसने बताया कि बोलेरो गाड़ी रोज सुबह घर से ले जाती और शाम को वापस घर छोड़ जाती। करीब 6 दिन तक वहां ले गए लेकिन एक भी रूपया नहीं दिया। किशोर लाल ने बताया कि गुरूवार सुबह यानी 12 जुलाई भी वापस बुलाने आए थे लेकिन पहले के रूपए नहीं दिए इसलिए उसने जाने से इंकार कर दिया। तब वे गांव के दूसरे लोगों को बोलेरो में बैठाकर ले गए।

शुक्रवार को संचालित नहीं हुई ओपीडी

कॉलेज के लोगों ने बांसड़ा व चोरबावड़ी गांव में सूचना की थी कि कॉलेज में आयुर्वेदिक चिकित्सा शिविर लगाया जा रहा है। यह सूचना नाईयों का गुड़ा व गोगुन्दा कस्बे में भी फैल गई। सूचना मिलने पर नया गुड़ा के हाबू लाल, अमरालाल, प्रभु लाल, किशन लाल, कैलाश चन्द्र, रमेश चन्द्र, बंशी लाल, दिनेश, कानाराम मेडिकल कॉलेज गए, लेकिन वहां गेट के ताला लगा हुआ था। सुरक्षा गार्ड ने अंदर जाने से रोक दिया। वहीं अंदर से आए नर्सिंग स्टाफ ने ओपीडी का समय समाप्त हो जाने की बात कह कर लौट जाने को कह दिया। जानकारी के अनुसार ओपीडी का समय सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक का है, मगर दोपहर 12 बजे व 1 बजे पहुंचे लोगों को अंदर नहीं जाने दिया गया।

गोगुन्दा से उपचार करवाने पहुंचे नवीन पालीवाल, अनमोल दिक्षित, प्रवीण प्रजापत, नरपत सिंह झाला, अजवेन्द्र सिंह झाला, योगेश प्रजापत व रवि पालीवाल ने बताया कि वे 12.30 बजे शिविर में उपचार करने पहुंचे लेकिन कॉलेज के मुख्यद्वार पर ताला लगा था। वहीं सुरक्षा गार्ड ने ओपीडी समय समाप्त हो जाने की बात कह कर वापस रवाना कर दिया।

इसलिए की जा रही है धांधली . . .
जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज की मान्यता उस चिकित्सालय को ही मिलती है, जिसमें 30 बेड़ की आईपीड़ी हो और ओपीड़ी पर रोजाना 50 से अधिक मरीजों का रजिस्ट्रेशन होकर मरीजों को उपचार किया जाता हो। वर्तमान में कला आश्रम आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग व बीएमएस के स्टूडेंस अध्ययनरत है। मगर यहां आयुर्वेद चिकित्सा संबंधित गतिविधियां बंद है। उपप्रधान पप्पू राणा भील ने बताया कि उनकी बैठक कॉलेज के सामने ही है लेकिन उन्होंने कभी यहां मरीजों को उपचार के लिए आते-जाते नहीं देखा।

वहीं सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि ओपीडी रजिस्टर में फर्जी लोगों के नाम लिखकर खानापूर्ति की जा रही है। निरीक्षण से पूर्व फर्जी मरीज और डॉक्टर नियुक्त कर दिए जाते है ताकि कॉलेज की मान्यता बरकार रहे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब न ओपीडी संचालित है ना ही आईपीडी तो फिर इस मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत छात्रों को सिखाया क्या जा रहा है ?

देखिए . . . ये विडियो

https://youtu.be/TW_TvwcRzvk

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