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जिसका बेसमेंट खोदा, उसी होटल में मिला बेस्ट सेलर का अवार्ड

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कुछ लोगों को विजय विरासत में मिलती है, वे ताउम्र विजयी रहते है और ज्यादातर लोग विजय के लिए ताउम्र संघर्ष करते है मगर विजयी नही हो पाते। वहीं कई लोग संघर्षों का डटकर सामना करते है, कर्म को प्रबल बना कर सकारात्मक प्रवृति व कर्म के बूते विजय प्राप्त करते है। जीवन की शुरूआत में ये लोग ‘‘शख्स’’ कहलाते है और विजयी होने के बाद वे ’’शख्सियत’’ बन जाते है। ऐसे ही ‘‘शख्स’’ से ‘‘शख्सियत’’ हुए लोगों से आपको रूबरू करवा रही है डेली राजस्थान डॉटकॉम की टीम . . .

आइए रूबरू करवाते है खाखड़ी गांव के युवा गणेश देवड़ा (तेली) से। उदयपुर जिले की गोगुन्दा तहसील के खाखड़ी गांव के गणेश ने संघर्षों की दुनिया में कदम रखा ही नहीं था उससे पहले ही संघर्ष इनकी झोली में आ गए। कोई दो साल पहले इन्होंने ऐसा निर्णय लिया, जिसे लेने का माद्दा हर कोई नहीं रखता। इन्होंने एक ऐसी सीमेन्ट कम्पनी की सेलिंग का काम स्टार्ट किया, जिसका नाम इनके क्षेत्र में कोई जानता तक नहीं था। निरमेक्स सीमेंट…। इसका नाम इस क्षेत्र के बहुत कम सीमेन्ट डीलर या सेलर जानते थे, आमजन तो अन्जान ही थे। देवड़ा ने इस सीमेन्ट की एजेन्सी ली और इसको गांव-गांव ढ़ाणी तक पहुंचाने का संकल्प लिया। बहुत ही कम समय में इन्होंने निरमेक्स सीमेन्ट की पहचान बनाई बल्कि सीमेन्ट की मांग खड़ी कर दी। देवड़ा ने सीमेन्ट सप्लायर के रूप ने पहचान स्थापित की है। वहीं कम्पनी ने हाल ही में 27 फरवरी को इन्हें बेस्ट सेलर अवार्ड से नवाजा है। निरमेक्स सीमेन्ट को ऊंचाई पर पहुंचाने वाले देवड़ा को कम्पनी अपना आर्दश डीलर भी बताती है। इस हेतु देवड़ा द्वारा किए गए प्रयासों को लेकर एक विडियों भी बनाया गया है। कम्पनी अपने अन्य डीलर्स एवं सेलर्स का मोटिवेशन बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यशालाओं में इस विडियों को दिखाती है। यह विडियों यू-ट्यूब पर मौजूद है।

अवार्ड लेते गणेश देवड़ा

देवड़ा बताते है कि सीमेन्ट का काम शुरू करने से पहले वे पोकलेन (एक्सवेटर) मशीनों के सुपरवायजर थे। निरमेक्स कम्पनी द्वारा उदयपुर स्थित होटल रमाड़ा के प्रथम तल पर आयोजित कार्यक्रम में देवड़ा को बेस्ट सेलर का अवार्ड दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि – जिस होटल के प्रथम तल पर उसे बेस्ट सेलर का अवार्ड दिया जा रहा है। एक समय था जब पोकलेन मशीन से इस होटल के बेसमेंट की खुदाई का कार्य किया था।

देवड़ा ने अब तक कई संघर्षों का सामना किया। 10वीं तक पढ़ाई की। 9वीं कक्षा में पढ़ते थे, उस समय पिता की मृत्यु हो गई। उसके एक साल बाद इनका विवाह भी करवा दिया गया। सामाजिक रीति-रिवाजों व परम्पराओं के निर्वहन ने आर्थिक रूप से कमजोर तो किया ही। हालांकि गणेश देवड़ा ने डेली राजस्थान के प्रतिनिधि से बातचीत के दौरान इन सब बातों का का जिक्र नहीं किया लेकिन ये सामाजिक सच्चाई है, जो हम सभी जानते है।

परिवार की स्थिति न बिगड़ जाए इस कारण पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार करने की सोची। उदयपुर में एक इलेक्टॉनिक्स दूकान पर 2000 मासिक वेतन का काम मिला लेकिन यह काम इनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा नहीं कर सका। इससे पढ़ाई का खर्च निकलना भी मुश्किल था। फलतः इन्होंने नौकरी छोड़ दी और पढ़ाई भी छोड़ दी। उस दरमियां उदयपुर सिरोही हाईवे का निर्माण कार्य चल रहा था। देवड़ा के कई साथी हाइवे के काम में विभिन्न कार्य कर रहे थे। इन्होंने भी नौकरी के लिए प्रयास किए और सफल रहे। यहां इन्हें सुपरवाइजर का काम मिला। मासिक वेतन 3000 रूपए तय किए गए। काम था सुपरवायजर का। पोकलेन मशीन चलाने वाले स्टॉफ का मैनेजमेंट देखना था। इन्होंने बड़ी सिद्दत के साथ इस कार्य को किया। 2008 तक इस जिम्मेदारी को संभाला। यहां इनका वेतन भी बढ़ते-बढते 5000 रूपए हो गया।

अब तक इन्होंने पोकलेन सुपरवायजर के रूप में पहचान कायम कर ली। इनके पास कई कम्पनियों के ऑफर आने लगे। बतौर पोकलेन सुपरवायजर इन्होंने राजस्थान के बारां, भरतपुर सहित कई जिलों में काम किया। पहचान बढ़ती गई और इनका काम दिल्ली तक पहुंच गया। मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, हरियाणा में काम करने के बाद दिल्ली में मेट्रो लाइन के काम में भी इन्हें जिम्मेदारी मिली। यहां तक पहुंचते-पहुंचते देवड़ा खुद भी पोकलेन मशीन ऑपरेटर बन गए, यहां तक कि इन्होंने मशीन की छोटी-बड़ी खराबियों को ठीक करने का हुनर भी सीख लिया। 2014 में अकेले ही 6-7 मशीनों को मैनेज करते थे। 2008 से 2015 तक देवड़ा प्रवास पर रहे। इन 7 सालों में बहुत सीखा और प्रसिद्धी हासिल की।

घर और क्षेत्र का मोह इन्हें वापस खींच लाया। घर व परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में भी कठिनाई आ रही थी। घर वापस आए तो कई दिनों तक यह तय नहीं कर पाये कि रोजगार के लिए क्या करें ? 2015 में निरमेक्स कम्पनी से नाता जोड़ा। गोगुन्दा में राजतिलक रोड़ पर श्री आशापुरा सीमेन्ट सप्लायर नाम की फर्म का संचालन आरम्भ किया। निरमेक्स सीमेन्ट की एजेन्सी ली और सप्लाई करने लगे। मृदुभाषा, मिलनसारिता और मधुर व्यवहार के कारण क्षेत्र के लोगों से संपर्क बनते देर नहीं लगी। दिन-रात लगकर निर्माण ठेकेदारों, निर्माण मिस्त्रियों से संपर्क बनाया और सीमेन्ट की सप्लाई को बढ़ाया। सीमेन्ट सेलिंग के नए-नए तरीके इजाद किए। कई प्रयासों में सफलता नहीं मिली लेकिन हताश नहीं हुए, लगे रहे…, लगे रहे…, लगे रहे… और ऐसे लगे कि महज दो सालों में निरमेक्स सीमेन्ट का नाम गांवों-गांवों व फलों-फलों के लोगों की जबान पर ला दिया। आज सीमेन्ट सप्लायर के रूप में गणेश देवड़ा जाना माना नाम हो गया है।

सकारात्मक ऊर्जा के धनी गणेश देवड़ा सोसायटी के लिए भी समर्पित है। इनकी पत्नि मजावड़ी ग्राम पंचायत के वार्ड की पंच है। देवड़ा ने केवल ग्रामीणों के दुःख दर्द में खड़े रहते है बल्कि उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए भी प्रयास करते है तथा सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर भाग लेते है।

वर्तमान समय में गणेश देवड़ा के कार्य, उनकी लगन, उनकी प्रसिद्धी उन्हें ‘‘शख्सियत’’ की सूची में शामिल करने के लिए पर्याप्त है।


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