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श्रीमद् भागवत कथा में कृष्ण रूकमणी विवाह में झूमें श्रद्धालु

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सौरभ जैन/सुनेल/झालावाड़ – सुनेल क्षेत्र के कनवाड़ा-कनवाड़ी में स्थित रामकुण्ड बालाजी मंदिर में चल रहे धार्मिक मेले के तहत श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन गुरूवार को मध्यप्रदेश के बिनागंज के पीपलखेड़ी के पंडित शिवदयाल भार्गव ने कहा कि कर्म में रमजाना सबसे बड़ा धर्म है सदा भगवान की कथा सुनो नक्षत्र का आभूषण चंद्रमा है, स्त्री का आभूषण पुरूष है सोना नहीं, धतुरा खाने से नशा होता है उससे ज्यादा भक्ति का नशा होता है, प्राणी नही है तो इस शरीर का अस्तिव नहीं है। व्रदावन ठाकुर का घर है, वहां जाने से आनन्द आता है।

कथा में गुरू के जीवन का महत्व बताते हुए श्रद्धालुओं से कहा कि गुरू से अधिक शिष्य श्रेष्ठ हो जाए तो गुरू का नाम होता है। रामकृष्ण परमहंस सामान्य गरीब थे, लेकिन उनके शिष्य विवेकानंद की श्रेष्ठता के कारण उनके गुरू को भी जाना जाता है। मनुष्य जीवन की कीमत नहीं समझता है। हम इस जीवन को विषय वासना व दुर्व्यसनों काम, क्रोध, लोभ, मोह के अधीन होकर बिगाड़ रहे है, धन नाशवान है। इसके पीछे जितना भागोगे उतना ही भगाएगा। छल कपट से कमाए धन से सुख नहीं मिलता। गलत कार्यो से कमाया धन गलत कार्यो में ही खर्च होता है। सुख-दुख ही जीवन है। व्यक्ति को अपनी नीयत साफ रखनी चाहिए। आज के समय में व्यक्ति खुद की चिंता छोडक़र दूसरे के सुख से दुखी है। जिस प्रकार चुनाव में राजनैतिक पार्टियां अपने चुनाव चिह््र का प्रचार करती है उसी प्रकार मनुष्य भी बार- बार ईश्वर का स्मरण करके स्वंय को प्रचारित करे तो वह मोक्ष प्राप्त कर लेता है। महिलाओं के पहनावे पर कटाक्ष करते हुए उन्होने सामाजिक नुकसान के बारे में बताया। उन्होने बताया कि अंग प्रदर्शन से महिलाओं की मर्यादा समाप्त होती है। मनुष्य आवश्यकताएं पूरी करते करते अपने कर्तव्य को भूल जाता है। भौतिक साधन के अभाव में भी अगर व्यक्ति शांत मिल जाती है तो यही उसके जीवन की सफलता है। ज्यादा साधन पाने वाले व्यक्ति संस्कारों को भूल जाते है। वही पंडित भार्गव ने संगीतमय भजन सुनाए तो श्रद्धालु झूम झूमकर नाचने लगे।

गुरूवार को महिला मंडल के तत्वाधान में विशाल कलश यात्रा बैण्डबाजे के साथ कनवाड़ा बावड़ी से शुरू हुई। जिसमें महिलाएं सिर पर मंगल कलश लिए हुए चल रही थी। नवयुवक नाचते हुए चल रहे थे। कलशयात्रा प्रमुख मार्गो से होती हुई रामकुण्ड बालाजी मंदिर पर पहुंची।

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