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फूलड़ोल महोत्सव का समापन, उमड़ा आस्था का ज्वार

आचार्यश्री का चार्तुमास शाहपुरा में होगा, ड्रोन से शोभायात्रा व धाम पर हुई पुष्पवर्षा

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आज अलसुबह 4 बजे से ही धाम में चहुं ओर से भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा स्थित रामनिवास धाम में हर तरफ राम नाम का जयघोष तथा राम का नाम ही सुनाई दे रहा था। यह आस्था के समुद्र के रूप में ऐसे दिख रहा था मानों यहां श्रद्धा व आस्था का ज्वर उमड़ पड़ा हो। देश-विदेश के विभिन्न अंचलों से करीब 50 हजार भक्त जनों ने रामस्नेही संप्रदाय के वार्षिकोत्सव फुलडोल महोत्सव में अपनी उपस्थिति दी। आस-पास के गावों से भी हजारों लोग भजन गाते हुए व लोक नृत्यों की प्रस्तुति देते हुए महोत्सव में पहुंचे। शाहपुरा के ग्रामीण अंचलों से भी हजारों की तादाद में यहां पहुंच कर नगर पालिका द्वारा लगाये गये अस्थाई मेले में डोलरों, चकरी का आनंद लिया। आस्था के ज्वार में भक्तों का सैलाब राजस्थान के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, मध्यप्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड के अलावा सिंगापुर व वियतनाम से पहुंचा। मंगलवार को अंतिम दिन चार्तुमास की घोषणा होते ही आस्था का ज्वार नीचे उतरने लगा तथा जनसैलाब धीरे धीरे छंटने लगा। पढ़िए शाहपुरा से वरिष्ठ पत्रकार मूलचंद पेशवानी की रिपोर्ट –

रामस्नेही संप्रदाय के फूलड़ोल महोत्सव का समापन आज अपरान्ह में रामनिवास धाम की बारादरी में संतो व हजारों भक्तों की उपस्थिति में आचार्यश्री रामदयालजी महाराज के चार्तुमास की घोषणा के साथ हुआ। आचार्य श्री रामदयालजी महाराज का आगामी चार्तुमास संप्रदाय की मुख्यपीठ शाहपुरा में होगा। इस दौरान शोभायात्रा व रामनिवास धाम पर ड्रोन से पुष्पवर्षा की गई।

आज महोत्सव के अंतिम दिन पूर्व चार्तुमास की विनती करने के लिए महाजनपुरा (मालपुरा), सुरत, नई दिल्ली, शाहपुरा (भीलवाड़ा), मानवत आदि शहरों की ओर से पेश की गई अरजियों का वाचन संतों की ओर से किया गया। दोपहर 12.15 बजे अभिजीत मुहर्त में आचार्यश्री द्वारा शाहपुरा में चार्तुमास की घोषणा करते ही रामनिवास धाम परिसर में मौजूद हजारों भक्तजनों में उत्साह का संचार व्याप्त हो गया। वहां के भक्तों ने आचार्यश्री से चार्तुमास की स्वीकृति स्वरूप गोटकाजी को प्राप्त किया तथा वहां के संत की अगुवाई में उसका गुलाल खेलते हुए जुलूस निकाला। इस दौरान वहां के भक्तों ने एक दूसरे को रंग, अबीर व गुलाल से सरोबार कर दिया।

चार्तुमास क्षेत्र तथा आस-पास के भक्तजनों ने रामनिवास धाम परिसर में गोटकाजी को लेकर शोभायात्रा निकाल कर अपनी खुशियों का इजहार किया। उल्लेखनीय है कि इस दौरान बारादरी में भक्तजनों का अनुनय विनय करने के दौरान उनके भावों में करूणा तथा बाद में शोभायात्रा के सुरजपोल पहुंचने पर वहां सुरजपोल से आचार्यश्री द्वारा अभिवादन करने का दृश्य वात्सल्यपूर्ण दिखा। यहां करीब 20 मिनट तक आचार्यश्री जनता व भक्तों का हाथ हिलाकर अभिवादन करते रहे।

फूलडोल महोत्सव के पांचवे दिन रामस्नेही संप्रदाय की परंपरा के मुताबिक शहर से आद्याचार्य की अणभैवाणी की शोभायात्रा निकाली गई। सदर बाजार में पार्षदों व जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया।

आज बारादरी में अपरान्ह में ठीक सवा बारह बजे आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने अपने अराध्य महाप्रभु रामचरण महाराज के चरणों में राम नाम सुमिरन करते हुए अपना इस वर्ष का चार्तुमास शाहपुरा में करने की घोषणा की। इस दौरान बारादरी के अलावा रामनिवास धाम में करीब 50 हजार भक्तजन मौजूद थे। महोत्सव के समापन की घोषणा के साथ ही भक्त जनों की वापसी शुरू हो गई है।

बारादरी में रहा आकर्षक नजारा

चार्तुमास की घोषणा के ठीक पहले बारादरी में आचार्यश्री से अनुनय विनय करने के लिए भक्तजनों का नजारा आकर्षक दिखा। हर कोई करूणा भाव से अरजी पेश कर भक्ति भाव का प्रदर्शन कर रहा था। व्यवस्था में लगे कार्यकर्ताओं के बार-बार रोकने के बाद भी चार्तुमास करने की प्रार्थना के लिए भक्त अपने शहर का नाम पुकारते-पुकारते रोने लगे। बाद में आचार्यश्री द्वारा सभी का अनुरोध महाप्रभु रामचरण के चरणों में प्रस्तुत करने के बाद चार्तुमास घोषित किया। आचार्यश्री रामदयालजी महाराज ने कहा कि इस वर्ष का 253वां चार्तुमास महोत्सव होगा।

351 व्यंजन लाये शोभायात्रा में

253वें फूलडोल महोत्सव के दौरान शोभायात्रा में चढ़ावे के रूप में 351 व्यंजन पेश किये गये। ये व्यंजन भक्तजन थाल में अपने सिर पर लेकर चले। उल्लेखनीय है कि महाप्रभु रामचरण महाराज के समय प्रमुख शिष्या सरूपाबाई ने एक बार 398 व्यंजन प्रस्तुत किये थे। आज शोभायात्रा में थाल सिर पर लेकर चलने वालों की संख्या पांच सौ से ज्यादा हो गयी थी, इसमें भक्तजनों के उत्साह को देखते हुए संख्या बढ़ती गयी।

सुरजपोल से आचार्यश्री ने किया अभिवादन

शोभायात्रा रामनिवास धाम पहुंचने के बाद आचार्यश्री सुरजपोल के ऊपर पहुंचे तथा बाहर से आये लोगों का अभिवादन स्वीकार कर सभी को आशीर्वाद प्रदान किया। वर्ष में केवल एक बार ही आचार्यश्री यहां पहुंच कर लोगों का अभिवादन स्वीकार कर आर्शिवाद प्रदान करते है।

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