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गोगुन्दा के प्रधान ने दिल्ली में साझा किए अनुभव

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गोगुन्दा/उदयपुर – उदयपुर जिले की गोगुन्दा पंचायत समिति के युवा प्रधान पुष्कर तेली ने पंचायतीराज विभाग द्वारा दिल्ली में आयोजित कार्यशाला में अनुभव साझा किए। इस दौरान उनके साथ गोगुन्दा के सरपंच गागू लाल मेघवाल भी थे। आज दिल्ली के स्कॉप कॉम्पलेक्ष में राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का आयोजन किया गया था, जिसमें देश के 16 राज्यों के जनप्रतिनिधियों ने श्यामाप्रसाद मुखर्जी रू-अरबन मिशन के तहत करवाए गए विकास कार्यों के संदर्भ में अपने अनुभव साझा किए।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्यामाप्रसाद मुखर्जी नेशनल रू-अरबन मिशन लांच किया था। स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देना व बुनियादी सुविधाओं को आगे बढ़ाना इस मिशन का मुख्य उद्देश्य है। इसके तहत कलस्टर बनाकर प्रत्येक कलस्टर में दो ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया था। इसमें उदयपुर जिले के गोगुन्दा को कलस्टर बनाया गया और गोगुन्दा व दादिया ग्राम पंचायत को शामिल किया गया था।

रू-अरबन मिशन की समीक्षा में पाया गया कि राजस्थान के उदयपुर जिले के गोगुन्दा कलस्टर की दोनों ग्राम पंचायतों में विभिन्न योजनाओं का कंवर्जेशन कर विकास कार्य करवाए गए इसलिए यहां के प्रधान पुष्कर तेली को कार्यशाला में आमंत्रित किया गया। प्रधान पुष्कर तेली ने बताया कि रू-अरबन मिशन के तहत गोगुन्दा के बायपास चौराहें पर एमपी लेड से सर्कल बनाया गया वहीं जनसहभागिता से महाराणा प्रताप की अश्वारूढ़ मूर्ति भी लगाई गई।

गोगुन्दा ऐतिहासिक गांव है। उदयपुर को बसाने वाले महाराणा उदय सिंह का देहांत यहीं हुआ था, उनका अंतिम संस्कार भी गोगुन्दा के राणेराव तालाब के पास किया गया था, जहां उनकी छतरी बनी हुई है। उनके बाद महाराणा प्रताप का राजतिलक भी गोगुन्दा में किया गया। महाराणा प्रताप ने संघर्षमय जीवन यहीं पर बिताया। गोगुन्दा के पास मायरा की गुफा को उन्होंने अपना आश्रय स्थल व शस्त्रागार बनाया। ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए पयर्टन के रूप में गोगुन्दा को विकसित करने के लिए राजतिलक स्थल पर भी कई काम करवाए गए। यहां एम्पीथियेटर, इको रेस्टोरेंट व रंगमंच का जीर्णोद्वार करवाया गया। राजतिलक स्थली की चारदिवारी पर महाराणा प्रताप की जीवन का चित्रण भी किया गया।

रू-अरबन मिशन के तहत गोगुन्दा के चौगान में सीमेंट की फर्श बनाई गई। महाराणा प्रताप कृषि व वनोपज गौण मण्डी का निर्माण भी करवाया गया। वहीं चौगान में होने वाले गणगौर मेले, धार्मिक समारोह व राष्ट्रीय पर्व के समारोह के लिए स्थायी स्टेज स्वीकृत कराया, जिसका निर्माण कार्य प्रगतिरत है। वहीं चौगान के पास बसस्टेण्ड भी स्वीकृत किया गया तथा उसका निर्माण कार्य भी प्रगतिरत है। ऐतिहासिक महत्व का स्थल होने के बावजूद गोगुन्दा में बसस्टेण्ड नहीं था। यहां से माउण्ट आबू, जोधपुर, रणकपुर, कुंभलगढ़ व नाथद्वारा जाने वाली बसें सड़क पर ही अनियंत्रित खड़ी रहती थी। बसस्टेण्ड के निर्माण हो जाने से बसें व्यवस्थित खड़ी की जा सकेगी, वहीं यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही मोटावीड़ा गांव में जनजाति विद्यार्थियों के लिए एकलव्य मॉडल रजिडेंसी स्कूल स्वीकृत किया जिसका निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है वहीं यहां दूसरा सत्र संचालित किया जा रहा है। यहां महाविद्यालय का निर्माण करवाकर उसका संचालन शुरू किया जा चुका है।

24 जून को सुबह प्रधान पुष्कर तेली ग्राम पंचायत के सरपंच गागू लाल मेघवाल के साथ दिल्ली के लिए रवाना हुए और कार्यशाला में पहुंचकर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में उनकी प्रस्तुति को काफी सराहा गया। वहीं वहां मौजूद अन्य जनप्रतिनिधियों ने सवाल जवाब भी किए। कार्यशाला में पीएमओ के अधिकारी, केंद्रीय पंचायतीराज मंत्री नरेन्द्र तोमर, पंचायतीराज विभाग के सचिव व रू-अरबन मिशन के उच्च स्तरीय अधिकारी मौजूद थे।

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