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वन विभाग ने नहीं की व्यवस्था, कैसे होगी वन्य जीवों की गणना

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कार्मिकों की लापरवाही से आज तक शाहपुरा में सही नहीं हो सकी वन्य जीवों की गणना

मूलचंद पेसवानी/शाहपुरा/भीलवाड़ा – शाहपुरा रेंज क्षेत्र में शनिवार से वनकर्मी बुद्ध पूर्णिमा पर रातभर वन्यजीवों की गणना करेंगे। वन रेंज शाहपुरा में वाटर हॉल पद्धति से 4 स्थानों पर गणना की जाएगी। गणना में विशेष रूप से लेपर्ड, भेड़िया, गीदड़, साई सहित अन्य पशुओं पर नजर रहेगी। वन्य जीव की गणना बुद्ध पूर्णिमा शनिवार के दिन सुबह 8 बजे से शुरू होकर रविवार 19 मई को सुबह 8 बजे तक चलेगी। परंतु शाहपुरा में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि वाटर हॉल पद्धति से होने वाली गणना से पूर्व उन स्थानों को साफ करके वहां पर पानी भरा जाना अनिवार्य था। शाहपुरा में ओदी से अरनिया घोड़ा बीड़ तक क्षेत्र में वन विभाग द्वारा चिन्हित एक वाटर हॉल सहित जल स्वालंबन अभियान के तहत बने तीन अन्य वाटर हॉल में से एक में भी पानी नहीं था। वो सभी सुखे पाये गये तथा किसी भी पाइंट पर कोई आवागमन का साधन वहां गत दिनों में पहुंचा हो, इसके कोई निशान नहीं मिला है। इससे साफ जाहिर होता है कि वन विभाग केवल खाना पूति करने पर आमादा है।

शाहपुरा वन विभाग की कार्य प्रणाली के संबंध में पूर्व में भी कई अनियमितताओं के सामने आने व ग्रामीणों की शिकायत होने के बाद भी यहां बरसों से जमें कार्मिकों के राजनीतिक प्रभाव के चलते उनके खिलाफ काई कार्रवाई न होने के कारण हर बार अनियमितता की शिकायत को दबा दिया जाता है।

Blank Water Hall

रेंजर गोविंद सिंह ने बताया कि वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की गणना वाटर हॉल पद्धति से की जाएगी। इसके लिए वाटर हॉल्स चुन लिए गए हैं। वाटर होलों पर मचान बना दिए गए है। एक-एक होल्स पर दो वनकर्मी बैठेंगे। इनको नियुक्त कर दिया गया है तथा शाहपुरा रेंज क्षेत्र में कुल चार स्थान चिन्हित किये गये है। आज तक वाटर होलों में पानी नहीं पहुंचने तथा इसके अभाव में वहां पशु कैसे पहुंचेंगें के सवाल पर वो निरूत्तर हो गये।

इस बीच यह भी जानकारी मिली है कि वन्य जीवों की गणना के लिए वन्यकर्मियों को स्वयं के स्तर पर ही संसाधन जुटाने पड़ते हैं। वन विभाग कोई साधन नहीं देता है। यहां तक की चौबीस घंटे खाने-पीने की व्यवस्था भी स्वयं के स्तर पर करनी पड़ती है। वनकर्मी को कागज व पैन देकर वाटर होल्स पर भेजा जाता है। इस कारण वो कार्मिक केवल खानापूर्ति कागजों में ही करने पर आमादा दिखायी दे रहे है, आज तक वाटर होल में पानी ही उपलब्ध न होने के कारण वहां पर पशुओं के पहुंचने की संभावना न के बराबर ही रहेगी।

उल्लेखनीय है कि मई माह के बीच गर्मी का प्रभाव अधिक रहता है। ऐसे में वन्य जीव 24 घंटे में एक बार पानी के प्वाइंट पर प्यास बुझाने के लिए अवश्य आता है। इस कारण पीपल पूनम को गणना की जाती है। इस दिन चन्द्रमा का प्रकाश भरपूर रहता है।

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