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मजाक बन रहा कानून विश्व तम्बाकू निषेध दिवस

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सौरभ जैन/सुनेल/झालावाड़ – सरकार ने सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पर रोक लगाने सम्बंधी कानून तो बना दिया, लेकिन इसकी पालना नही होने से यह कानून मजाक बनकर रह गया है। कस्बे में सार्वजनिक स्थानों पर बीड़ी सिगरेट के काश लगाकर हवा में छल्ले छोड़ते हुए कानून का धुंआ निकालते अक्सर देखने को मिल जाते है। सरकारी कार्यालयों में भी ध्रुमपान निषेध अधिनियम के बोर्ड तो टांग लिए पर वहां भी बीड़ी-सिगरेट का उपयोग तो होता ही है। कहीं चोरी-छुपे तो कहीं खुलेआम कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति ही होती रही है। सार्वजनिक स्थानों पर तो खुलेआम धूम्रपान करना आम बात हो गई है। हर वर्ष 31 मई को विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाकर सरकार औपचारिकता पूरी कर लेती है। धूम्रपान निषेध कानून लागू कराने में प्रशासन व सरकार कितनी सजग है इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कानून का उल्लघंन करने पर गिनती के लोगों को ही पकड़ा गया।

सेहत को नुकसान

चिकित्सकों के मुताबिक बीड़ी व सिगरेट में कई ऐसे तत्व होते है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। ध्रुमपान श्वसन तंत्र के हर हिस्से पर असर करता है। नाक, गला, श्वास नली व फेफड़ों में सूजन आ जाता है। सूजन के कारण इसकी लत वालों को खांसी आने लगती है। सिगरेट के कागज में टाय नाम पदार्थ होता है जो कई बीमारियों को जन्म देता है। फेफड़ों का कैंसर, हार्ड अटैक, अस्थमा, दमा, क्षय रोग आदि बढ़ने का अंदेशा रहता है।

यह कैसा प्रतिबंध

राज्य सरकार ने धूम्रपान निषेद्य अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर धूमप्रान करीब छह वर्ष पूर्व सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पर पूर्ण प्रतिबंध के अलावा गुटखे की बिक्री पर भी रोक लगाई थी, लेकिन यह महज कागजों में हो रही है। गुटखा निर्माताओं ने पान मसाला बनाना शुरू कर उनके साथ तम्बाकू के अलग से पाउच बाजार में उतार दिए। लोग इनका मिश्रण कर अपना शौक पूरा कर रहे है।

यहां उड़ रही धज्जियां

कस्बे के कई सार्वजनिक स्थलों का जायजा लिया तो हालात चौंकाने वाले दिखे। सुनेल चिकित्सालय के समीप गुमटियों पर गुटखा व सिगरेट खुलेआम बिक रहे थे तो कई लोग परिसर में धुएं के छल्ले उड़ा रहे थे। वही कस्बे के राजकीय स्कूल के प्रवेश द्वार से करीब 20 फीट दूरी पर गुटखे के पाउच बिक रहे थे। जबकि अधिनियम में सार्वजनिक स्थलों से 200 मीटर की दूरी में धूम्रपान सामग्री की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

छोटे बच्चों में भी लत

सहज उपलब्ध होने से अब छोटे बच्चों को भी गुटखे की लत लग रही है। कई बार विद्यालय में बच्चों से गुटखे छीनकर फेंके है। इनकी बिक्री पर प्रभावी रोक लगाने के लिए और भी कड़े कदम उठाने होंगे।

कोटपा कानून

सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर अंकुश के लिए सिगरेट एवं अन्य तंबाकू नियंत्रण अधिनियम (कोटपा) 2003 बनाया हुआ है। अधिनियम की धारा 4 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दो सौ रूपये जुर्माने का प्रावधान है। अधिनियम के तहत सभी सार्वजनिक स्थालों पर धूम्रपान निषेध क्षेत्र का बोर्ड लगाने समेत अन्य प्रावधान भी है।

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