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कृष्ण का मथुरा गमन प्रसंग सुनकर रो पड़े भक्त

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रवि मल्होत्रा/उदयपुर – पं. स्कन्द कुमार पंड्या द्वारा सेक्टर 3 के शिव मंदिर में की जा रही भागवत कथा के 21वें दिन भागवत पांडाल में मौजूद हर भक्त की आंखों में उस वक्त अश्रूधारा बह निकली जब व्यास पीठ से पं. स्कन्द कुमार ने श्रीकृष्ण के गोकूल छोड़ मथुरा गमन का मार्मिक प्रसंग सुनाया।

प्रवक्ता अभिषेक जोशी ने बताया कि प्रसंग सुनाते हुए पंड्या ने कहा कि जैसे ही अक्रूर जी कृष्ण को लेकर रथ में मथुरा के लिए रवाना हुए। गोपियां बूत-सी बनी एकटक रथ को निहार रही है। राधा की तो सुध बुध ही खो गई। यह देख कृष्ण ने अपनी बांसूरी राधा को दी और कहा इस बांसूरी में मैं ही हूं इसे अपने पास रखना और कृष्ण ने उसी दिन से बांसूरी बजाना भी त्याग दिया।

मैया यशोदा का भी रो-रो कर बुरा हाल है और वो कह रही है कि लल्ला सब याद रखना पर ये भूल जाना की मैंनें तुम्हें रस्सी से बांधा था। जब कृष्ण कहते है कि मां में सब भूल जाउंगा पर ये कभी नहीं भुलूंगा क्योंकि मईया तूने तो मुझे मां की ममता के बंधन में बांधा था। श्री कृष्ण के मथुरा गमन के इस मार्मिक चित्रण के साथ ही ‘‘सूना सूना लागे बिरज का धाम, गोकूल को छोड़ चले घनश्याम’ भजन पर हर भक्त रो पड़़ा और आखिर सभी से मिलते हुए कृष्ण मथुरा के लिए निकल पड़े।

शाम को श्री जगत शिरोमणि मंदिर में कथा वाचन करते हुए पंड्या ने कहा कि चाहे जीवन में कैसी भी परिस्थिति हो, ईश्वर से विमुख कभी नहीं होना चाहिए। सुख – दुःख नदी के दो किनारे है, ऐसा नहीं हो सकता कि हमारे जीवन में दुख हो ही ना। सुख की तरह दुख भी जीवन का अनिवार्य अंग है।

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