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महात्मा गांधी की जीवनी पर फड़ बना रहे है शाहपुरा के फड़ चित्रकार

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भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा कस्बे के जोशी परिवार द्वारा करीब 600 वर्ष आरम्भ की गई फड़ चित्राकारी आज विश्वभर में प्रसिद्ध हो चुकी है। फड़ चित्राकारी को लेकर इस परिवार के पूर्वजों सहित वर्तमान में कार्य रहे सदस्यों को कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। इस परिवार के फड़ चित्रकारी के सिद्धहस्त शिल्पी विजय जोशी, विवेक जोशी व सुश्री प्रतिभा जोशी अब महात्मा गांधी की जीवनी को फड़ में चित्रांकित करने में लगे है। शाहपुरा से मूलचन्द पेसवानी की रिपोर्ट . . .

यह फड़ अद्धितीय होगी, इस फड को तीन भाषाओं अंग्रेजी, हिन्दी व गुजराती में बनाया जाएगा, फड़ चित्रों पर केलिग्राफी की जायेगी जो सुश्री अनुष्का जोशी करेगी। इस फड की डाक्यूमेन्ट्री भी बनाई जायेगी। फड की साईज अलग-अलग होगी जिसमें 6 गुना 28 फिट एवं 5 गुना 33 फिट एवं 40 फिट तक होगी। सर्वप्रथम अंग्रेजी की फड़ बनाई जा रही है। इस फड़ को प्राकृतिक रंगों से तैयार किया जायेगा। फड़ चित्रकारी शाहपुरा शैली की जो अति प्राचीन, दुर्लभ, अनुपम एवं अद्वितीय है। यह कला भारतीय कला एवं संस्कृति का अभिन्न अंग है, बकौल विजय जोशी

गांधी ऐसे आदमी थे जिन्होंने सत्य पर आधारित जीवन को अपनाया और सत्याग्रही आन्दोलन को नैतिकता के मापदण्ड़ों पर संचालित किया। उन्होंने सत्याग्रह आन्दोलन में आम लोगों की सहभागिता निश्चित कर उसे व्यापक आधार दिया और सत्य पर आधारित जीवन की और अग्रसर किया। यूं तो गॉधी जी पर कई छाया चित्र एवं फिल्में मौजूद है मगर यह विश्व में अमिट फड़ चित्रकारी होगी। यह दुनिया में फड कला की एक अनुपम कृति के रूप में जानी जायेगी। जिसे दुनिया वर्षो तक याद रखेगी।

जोशी बताते है कि फड़ चित्र लोक गाथाओं का चित्रण है। जिसे भोपा एवं भोपी द्वारा वाध्ययंत्र के द्वारा कहानी को गाकर के बताया जाता है। फड़ चित्र बनाने के लिए कलर एवं कपडा हमारे द्वारा ही तैयार किया जाता है। पड़ का सामान्य अर्थ है कथात्मक चित्र। पड़ का समानार्थी शब्द फड़ है और यह शब्द ही लोक व्यवहार मे प्रचलित है।

उन्होंने बताया कि उनके द्वारा लोक गाथाओं के अलावा धार्मिक एवं दंत कथाएं, ऐतिहासिक एवं आज के समय के विषयों पर शाहपुरा फड़ शैली में चित्रांकन किया है। दुर्गा चालीसा, (हिन्दी एवं अग्रेजी), हनुमान चालीसा, सुन्दर काण्ड (हिन्दी एवं अग्रेजी) रामायण, महाभारत, शिव चालीसा, सत्यनारायण कथा, कृष्ण लीलाएं, रानी पद्मिनी, हल्दीघाटी, संयोगिता हरण, पृथ्वीराज-गौरी, शाहपुरा गणगौर सवारी, तीज उत्सव, साक्षरता पर एवं अनेक विषयों पर कार्य किया है एवं निरंतर जारी है। उन्होंने सर्वप्रथम अंग्रेजी फड़ की शुरूआत की गई जिसे बहुत सराहा जा रहा है भारत और विदेशों में।

फड़ चित्रण किस शैली में बनाये जाते है ?

फड़ चित्र शाहपुरा शैली में बनाये जाते है जो कि शाहपुरा फड़ चित्रकारी के नाम से जाने जाते है एवं शाहपुरा फड़ चित्रकारी के नाम से सम्पूर्ण विश्व में जानी जाती है जिसका उद्भव 600 वर्ष पूर्व शाहपुरा में ही हुआ था। जोशी के पूर्वजों के वंशज सिर्फ शाहपुरा में रह करके ही मुल कला का कार्य कर रहे है।

फड़ चित्रकारी के लिए शाहपुरा के विश्वविख्यात फड़ चित्रकार विजय जोशी को राष्ट्रीय मेरिट पुरस्कार, राष्ट्रीय फेलोशिप एवं स्टेट ब्रांज मेडल एवं विवेक जोशी को राष्ट्रीय स्कॉलरशीप एवं फेलोशिप से नवाजा जा चुका है। जोशी द्वारा निर्मित फड़ चित्रकारी राष्ट्रीय एवं अर्न्तराष्ट्रीय म्यूजियमों एवं प्राईवेट स्थानों पर सुसज्जित एवं शोभायमान है। जोशी द्वारा 2005 में अमिताभ बच्चन, मिलेनियम सुपर स्टार पर भी फड़ का निर्माण किया जा चुका है। जिसे देश ही नहीं विदेशों में भी सराहा गया। इसके अलावा कई अन्य विषय पर भी जोशी कार्य कर रहे है।

अर्न्तराष्ट्रीय फड़ चित्रकार पिता शान्ति लाल जोशी को शाहपुरा शैली की फड़ के लिए कई सम्मान मिल चुके है। वर्ष 1991 में राष्ट्रपति ड़ॉ शंकरदयाल शर्मा के हाथों पुरस्कृत हो चुके है। इसी वर्ष कलाश्री की उपाधि मिली। विजय जोशी की सुपुत्री सुश्री अनुष्का जोशी भी फड़ में सिद्धस्त हो रही है, 7वीं कक्षा में अध्ययनरत अनुष्का जब चित्रकारी करती है, देखने वाले अचम्भित हो जाते है।

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