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भारतीय संस्कृति का आधार है चरण स्पर्श, जिसमें हर समस्या का है समाधान : राहुल कपूर जैन

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रवि मल्होत्रा/उदयपुर – टच स्क्रीन मोबाइल से विश्वभर का ज्ञान तो मिलता है, लेकिन इसकी अति तकलीफ देती है। तकनीक के दुरुपयोग से रिश्ते टूटते जा रहे हैं। लेकिन टच स्क्रीन की जगह अगर टच फुट यानि चरण स्पर्श किया जाए तो उसका कोई भी नुकसान नहीं है, बल्कि आपको फायदा ही देगा। टेक्नोलॉजी ने हमें परिवार और खुद से तोड़ दिया है टेक्नोलॉजी की ऐसी बाढ़ आई है, जिसे हम समझ नहीं पा रहे हैं। वह हम पर हावी हो गई है इस कारण से बीमारी, डिप्रेशन, टूटते- बिखरते रिश्ते, सुसाइड, तलाक यह सब बढ़ रहा है। रिश्तों और पारिवारिक मूल्यों पर अपना यह खास उद्बोधन जाने-माने मोटिवेशनल स्पीकर राहुल कपूर जैन ने रविवार को जैन इंटरनेशनल ट्रेडिंग ऑर्गेनाइजेशन जीतो द्वारा शौर्यगढ़ में आयोजित चरण स्पर्श कार्यक्रम में हजारों शहरवासियों को दिया।

चरण स्पर्श कार्यक्रम को समझाते हुए राहुल कपूर ने बताया कि उनका चरण स्पर्श खासतौर से विज्ञान, मनोविज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान के साथ जुड़ा हुआ है, क्योंकि वर्तमान में तीन पीढ़ी के लोग हैं, जिन्हें पारिवारिक संस्कार और जीवन मूल्यों को समझाना है। राहुल कपूर ने बताया कि हमारा कपाल ब्रह्मांड से एक कनेक्शन के माध्यम से जुड़ा हुआ है, जो सूरज और चांद की एनर्जी को ग्रहण कर उसे नसों के माध्यम से चरण तक ले कर आता है। इसलिए चरण स्पर्श में पैर छुए जाते हैं, और चरण स्पर्श के दौरान झुका इसलिए जाता है, कि जब व्यक्ति झुकता है, तब उसका मान उसका कषाय झुकता है, जिससे सामने वाला चाहे कोई दुश्मन भी हो तो वह भी उसके सामने झुकता है, और जब शरीर मैं ब्रह्मांड की शक्ति हम ग्रहण कर कषाय को दूर कर लेते हैं, तब कहीं जाकर हम आध्यात्मिक जीवन की ओर आगे बढ़ते हैं।

हर रिश्ते में, हर भाव में है केमिकल

पारिवारिक रिश्तों पर अपने विशेष उद्बोधन में राहुल कपूर जैन ने कहा कि हमारे हर रिश्ते के भाव केमिकल से कनेक्ट होते हैं, यह पूरा खेल केमिकल का है। हर चीज में केमिकल है, दुखी हो तो केमिकल, सुखी हो तो अलग केमिकल, ध्यान, पढ़ाई, आध्यात्मिक ज्ञान हर एक के अलग-अलग केमिकल होते हैं। एक विशेष प्रकार का ऑक्सीटॉक्सिन केमिकल मां के गर्भ से बच्चों को मिलता है जो विश्वास पैदा करता है। हम किसी को छूते हैं, गले लगाते हैं, या उसे चूमते हैं तब विश्वास पैदा होता है, इसलिए परिवार के सदस्यों को गले लगाना चाहिए। प्रशंसा करने से सिरोटोमिन केमिकल प्रभावी होता है, जो हमारे भाव को मन को बदलता है। हंसने से इंडोर फिन केमिकल इंप्रूव होता है, वहीं कुछ नया करने से डोपामिन केमिकल बढ़ता है। टेक्नोलॉजी के ज्यादा उपयोग से, ज्यादा तनाव, डर कर जीने, बातों को दबाने, खुल कर बात ना करने, कम रेस्ट से कोर्टिसोल केमिकल बनता है। अगर हम इस केमिकल के प्रभावों को सामान्य रखना है तो यह सब तभी होगा जब हम अपने परिवार के साथ पहले की तरह खेलेंगे, हसेंगे, गुनगुनायेंगे, पिकनिक पर जाएंगे, एक दूसरे के साथ प्यार से रहेंगे तभी हम तनाव, क्रोध, डर इन सब से आगे निकल कर आध्यात्मिक ज्ञान की ओर बढ़ेंगे।

खुश रहने के लिए दी यह सीख

राहुल कपूर जैन की स्पीच को सुनने आये हजारों लोगों को खुश रहने का एक सूत्र बताते हुए राहुल ने कहा कि पहले संसार के अच्छे कर्तव्य को निभाना है, तभी हम आध्यात्मिक ज्ञान कि ओर आगे बढ़ेंगे। उसके लिए जरूरी है, कि परिवार में अच्छे से जीना सीखें मां-बाप के प्रति हमारे कर्तव्य को पूरा करें, पति पत्नी को दोस्त बनकर, भाई-भाई और भाई-बहन को प्यार से रहते हुए, बहू जब बेटी बनकर रहे, दादा-दादी, नाना-नानी के रिश्तों का आदर किया जाए। सास-मां बन कर जीएं तभी हम सांसारिक प्रगति करेंगे, जिससे मन और तन दोनों स्वस्थ रहेंगे तभी आध्यात्मिक प्रगति हो पाएगी।

जीतो की विकास यात्रा देख अभिभूत हुए लोग

चरण स्पर्श कार्यक्रम के दौरान मोटिवेशनल स्पीकर राहुल कपूर जैन की स्पीच से पहले जैन इंटरनेशनल ट्रेडिंग आर्गेनाइजेशन जीतो द्वारा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए विभिन्न कार्यों को शार्ट मूवी के माध्यम से दर्शाया गया। कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, जीतो अपेक्स प्रेसिडेंट गणपत चौधरी, यूसीसीआई अध्यक्ष हंसराज चौधरी, जीतो अपेक्स के सीईओ ललित जैन, जीतो राजस्थान जॉन चेयरमैन शांतिलाल मारू, जीतो अपेक्स डायरेक्टर अशोक कोठारी, जीएटीएफ़ जीतो उदयपुर चेप्टर चेयरमैन शांतिलाल मेहता, जीएटीएफ़ जीतो उदयपुर चेप्टर के जनरल सेक्रेटरी महावीर चपलोत सहित जीतो के अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने भी अपना उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ नवकार मंत्र के साथ हुआ और राहुल कपूर जैन की स्पीच के अंत में राष्ट्रगान के साथ समापन हुआ।

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