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फिर मरहम लगाने आए मुम्बईकर, किसान बोले जिंदाबाद

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मुंबई – रातों के अंधेरे और दिन की कड़ी धूप में पांवों के छालों की परवाह किए बगैर हजारों किसान उम्मीदें लेकर मुंबई पहुंचे। यह शहर किसी को निराश नहीं करता है, फिर इस बार तो मामला अन्नदाताओं का था। ऐसे में मुंबई कैसे पीछे रहती। किसानों के दिल के जख्म तो सरकार द्वारा मांग पूरी करने पर ही भरने वाले थे लेकिन 180 कि.मी. के सफर के बाद थके हुए पांवों को मुंबईकर मरहम लगाने जरूर पहुंच गए। सोमवार अलसुबह आजाद मैदान पहुंचे हजारों किसानों के लिए मुंबईकरों ने ठीक वैसे ही व्यवस्था की जैसे हर बार परीक्षा की घड़ी में इस शहर के लोग करते आए हैं।

जब पार्टी से बड़े हो गए लोग

इस किसान आंदोलन को पूरे विपक्ष ने समर्थन दिया था। इसके पीछे राजनीतिक मकसद हो सकते हैं लेकिन जब पेट की भूख मिटाने और पांवों के छालों पर मरहम लगाने की बारी आई, तो राजनीतिक पार्टी के झंडे के नीचे खड़ा हर एक शख्स मुंबईकर हो गया। शेतकरी कामगार पक्ष की पनवेल-उरण शाखा ने किसानों के लिए भाकरी और भाजी की व्यवस्था की। वहीं जामिया मिलिया इस्लामिया (महाराष्ट्र) ने बिस्किट और नमकीन की व्यवस्था की। शिवसेना ने पानी और खानपान की व्यवस्था की। मुंबई यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश यादव के नेतृत्व में आजाद मैदान में किसानों को चाय, बिस्किट और पानी वितरित किया गया। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्त्ता किसानों के बीच जा कर उन्हें पानी-चाय उपलब्ध करा रहे थे।

राजनीतिक पार्टियों के अलावा बीएमसी प्रशासन भी आजाद मैदान की सफाई में जुटा हुआ था। कई एनजीओ ने अपने स्तर पर किसानों की मदद करते दिखे। रॉबिन हुड आर्मी नामक एक एनजीओ ने 240 किसानों को चप्पल बांटी। संस्था की सदस्य फैजा धनानी ने बताया कि सोशल मीडिया पर हमने देखा था कि कई किसान बगैर चप्पल के मुंबई चल कर आ रहे हैं। ऐसे में हमने उन्हें चप्पल देने का फैसला किया। वैसे तो हमारी संस्था शादी-विवाह या अन्य आयोजनों में बचने वाले खाने को जरूरतमंदों को देती है, लेकिन इस बार हमने कुछ अलग करने का सोचा।

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