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चढ़ोतरा रोकने पर पुलिस पर किया पथराव, 14 हमलावर गिरफ्तार

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डिवाइएसपी व थानाधिकारी की जीपों को किया क्षतिग्रस्त, डिवाइएसपी सहित 6 पुलिसकर्मी चोटिल, हेड कांस्टेबल गंभीर घायल

गोगुन्दा/उदयपुर – उदयपुर जिले बेकरिया थाना क्षेत्र में आदिवासी गरासिया समुदाय के लोगों ने मौताणे के लिए सालरिया गांव के एक परिवार पर चढ़ोतरा करना चाहा, जिन्हें रोकने पर गुस्साये गरासिया समाज के लोगों पुलिस पुलिस पर पथराव कर दिया। जिसमें कोटड़ा डिवाईएसपी शंभू सिंह राठौड़, कोटड़ा थानाधिकारी देवी सिंह, माण्डवा थाने के हेड कांस्टेबल भागीरथ, एमबीसी के जवान लाल शंकर, चालक नाहर सिंह चोटिल हो गए। हेड कांस्टेबल भागीरथ पर जानलेवा हमला हुआ, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गया। हमलावर भागीरथ का मोबाइल भी ले भागे। उसके बाद पुलिस जाप्ते व एमबीसी के जवानों ने घेरा डालकर 14 हमलावरों को पकड़ा, वहीं कई हमलावर पिण्ड़वाड़ा की ओर भाग गए। पुलिस ने हमलावरों के विरूद्ध मामला दर्ज किया है वहीं आरोपियों को डिटेन किया जा रहा है।

विवाहिता के जहर पीकर आत्महत्या करने से उठा था मामला

आपको बता दे कि यह घटना मंगलवार को दोपहर को हुई थी। पुलिस से दोपहर में बात नहीं पाई वहीं देर शाम को बेकरिया थानाधिकारी अमराराम मीणा ने प्रेस नोट जारी कर मीडिया को घटना की जानकारी दी। अमराराम मीणा ने बताया कि 20 मई को सुबह सवा 9 बजे थाना क्षेत्र के सालरिया गांव की लच्छी गरासिया की जहर पीने से मृत्यु हो जाने की सूचना मिली थी। उसके बाद पुलिस का एक दल सालरिया भेजा और मृतका के पीहर पक्ष के लोगों के आने के बाद वे स्वयं भी सालरिया पहुंचे। सायं 6 बजे दोनों पक्षों की मौजूदगी में शव को पोस्टमार्टम के लिए बेकरिया की सीएचसी की मोर्चरी में पहुंचाया। थानाधिकारी ने बताया कि पीहर पक्ष की ओर से कोई रिपोर्ट नहीं दी गई।

40-45 जीपों में सवार होकर आए लोग, कानूनी कार्यवाही की बजाए मौताणे पर अड़े

21 मई की सुबह पीहर पक्ष के लोग पिण्ड़वाड़ा के बसंतगढ़ से भारी दलबल के साथ जीपों में सवार होकर मोर्चरी के बाहर आ गए। थानाधिकारी ने मौके की नजाकत को भांपते हुए उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया। जिस पर कोटड़ा डिवाईएसी शंभू सिंह राठौड़ भी मौके पर पहुंचे। वहीं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कोटड़ा व माण्ड़वा के पुलिस जाप्ते सहित एमबीसी के जवान भी बुला लिए गए। उसके बाद बसंतगढ़ से 10-11 जीपों में ओर लोग आ गए। तब दोनों पक्षों को थाने के बाहर बैठाकर वार्ता करवाई गई। यहां पीहर पक्ष की रिपोर्ट लेकर कार्यवाही शुरू कर दी गई। मगर बसंतगढ़ के लोग कानूनी कार्यवाही की बजाए मौताणा लेने पर अड़े रहे थे।

चढ़ोतरा करने से रोकने पर पुलिस पर किया पथराव, डिवाईएसपी सहित 6 पुलिसकर्मी हुए चोटिल

करीब डेढ़ बजे पिण्ड़वाड़ा की ओर से एक ओर जीप आई, जिसकी छत पर भी लोग बैठे हुए थे, वे गालियां निकाल रहे थे तथा पास आकर उन्होंने सीटियां बजाई और सालरिया गांव की ओर मुड़ चलने की मुनादी करके सालरिया की ओर रवाना हो गए। वहीं थाने के बाहर बैठे मृतका के पीहर पक्ष के लोग भी 7-8 जीपों में सवार होकर उस जीप के पीछे रवाना हो गए। यह देखकर पुलिस अधिकारी जाप्ते सहित उन गाड़ियों के पीछे लग गए और हाइवे पर पीलका कट के पास उन जीपों को रूकवाकर समझाइस करनी चाही लेकिन आक्रोशित लोग नहीं माने और मृतका के ससुराल पक्ष के घर पर हमला करने घर जलाने की धमकी देते हुए सालरिया जाने लगे। पुलिस ने घेरा डालकर उन्हें रोकना चाहा लेकिन उन लोगों ने पत्थर फैंकने शुरू कर दिए, साथ ही लाठियों से पुलिस के लोगों पर हमला कर दिया। हमलावरों ने डिवाईएसपी की बोलेरो जीप व बेकरिया थाने की महिन्द्रा जीप पर लाठियों से वार कर क्षतिग्रस्त कर दिया। हमले में डिवाईएसपी सहित 6 पुलिसकर्मी चोटिल हो गए, वहीं हेड कांस्टबेल भागीरथ गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे बाद में उपचार के लिए उदयपुर भिजवाया गया।

11 पुरूष व 3 महिलाएं गिरफ्तार, समाज का मुखिया व रामपुरा सरपंच भी शामिल

थानाधिकारी अमराराम मीणा ने बताया कि हमले के बाद हमलावर हाइवे से पिण्ड़वाड़ा की ओर भागने गले। कुछ तो पैदल ही दौड़कर भागे वहीं कई लोग जीपों में सवार होकर भागे। इस दौरान पुलिस ने घेरा डालकर पैदल भाग रहे 11 पुरूषों व 3 महिलाओं को पकड़ा। इनमें से कालूराम गरासिया के पास से तलवार भी जब्त की गई। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार हुए लोगों में समाज का मुखिया खीमाराम गरासिया, रामपुरा ग्राम पंचायत का सरपंच पेमाराम गरासिया सहित एक रोजगार सहायक भी शामिल है। आरोपियों के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 147, 148, 149, 332, 353, 307, 379 व पीडीपी एक्ट की धारा 3 तथा आर्म्स एक्ट के अंतर्गत मामला दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है।

मृतका का पीहर पक्ष लेना चाहता था मौताणा

जानकारी के अनुसार मृतका के परिजन पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाने के बजाए मृतका के ससुराल पक्ष पर चढ़ोतरा कर मौताणे की राशि लेना चाहते थे। जबकि पुलिस द्वारा बार-बार कानूनी कार्यवाही के लिए रिपोर्ट देने की बात कही जा रही थी जो पीहर पक्ष वालों को ठीक नहीं लग रही थी।

आपको बता दे कि आदिवासी गरासिया समाज में मौताणा जैसी कुप्रथा व्याप्त रही है। जिसके अंतर्गत समाज के पंच एक पक्ष के साथ लगकर दूसरे पक्ष पर चढ़ोतरा करते है और दूसरे पक्ष को मजबूर उससे मौताणे की रकम ली जाती है। यह रकम लाखों में होती है। उदयपुर के गोगुन्दा, झाडोल, फलासिया व कोटड़ा क्षेत्र में मौताणे के लिए चढ़ोतरे की कई घटनाएं होती थी लेकिन सामाजिक जागरूकता व बदलाव के चलते यहां के लोगों ने मौताणा प्रथा को लगभग बंद ही कर दिया। कई समय बाद पिण्ड़वाड़ा के बसंतगढ़ के लोगों ने मौताणे के लिए चढ़ोतरा किया है।

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