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सैय्यद गुलाब शाह की दरगाह पर महफिल ए मिलाद ने बांधी शमां

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मेरा नाम ख्वाजा मोईनुद्दीन तू रसुलपाक की आल है

मुबारिक अजनबी/आमेट – नगर के नदी दरवाजा स्थित हजरत सैय्यद गुलाब शाह की दरगाह पर आशिंके शहीद गुलाब शाह द्धारा बीती रात्रि को रखी महफिले ए मिलाद के आयोजन ने ऐसी शमा बांधी कि अकिकतमंद सुब्बाहन अल्ला, सुब्बाहन अल्ला कह उठे। नगर के जामा मस्जिद के मौलाना मोहम्मद मुस्तकीम, मदीना मस्जिद के मौलाना नसीम अख्तर, मिलाद पार्टी के अधिवक्ता शराफत हुसैन फौजदार, मोहम्मद हुसैन शोरघर, फकीर मोहम्मद चाबुकसवार आदि ने कुराने पाक की तिलावत से महफिले ए मिलाद का आगाज करते हुए ‘अशें आजम से प्यारा-प्यारा मुझकों लगता है, रोजा नबी का‘, ‘बुलबुलें शिदरातुल मुमताहै से पुछलो रूतबा क्या है नबी का’, ए सब्जे गुम्बद वाले मंजुर दुआ करना जब वक्त नजर आये दिदार अता करना’, ‘मेरा नाम ख्वाजा मोईनुद्दीन तू रसुल पाक की आल है’, ‘यहां सबकी भरती है झोलियां मेरा ख्वाजा बंदा का नवाज’ आदि एक से बढ़कर एक पैश की। नाते पाक पर अकिकतमंद सुब्बाहन अल्ला, सुब्बाहन अल्ला कह उठे।

इस अवसर पर कांग्रेस अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष शराफत हुसैन फौजदार, मुस्लिम महासभा के प्रदेशाध्यक्ष जाफर खान फौजदार, काशम खान मंसुरी, मुबारिक खान, बुन्दू कुरेशी, अमीर मोहम्मद शोरघर, फकरूद्दीन मंसुरी, आजाद छीपा, फिरोज खान शेख, इब्राहिम मंसुरी, बाबु खान पठान, फिरोज मंसुरी सहित बडी संख्या में महिला-पुरूष अकिकतमंद उपस्थित थे।

चादर पैश कर मांगी अमन चैन की दुआ

महफिले ए मिलाद से पूर्व सभी अकिकतमंदों ने हजरत सैय्यद गुलाब शाह के आस्ताने पर चादर पैश कर आपसी सौहार्द्ध, भाईचारा एवं अमन, चैन के लिए दुआं मांगी।

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