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’संकल्प रैली बाड़मेर की राजनीति की दिशा तय करेगी’

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’संकल्प रैली बाड़मेर की राजनीति की दिशा तय करेगी’

’सभी दावेदारों ने भीड़ जुटाने के लिए लगाया जोर’

’पुराने चेहरों से ऊब गए मतदाता,नए चेहरे लाने होंगे जीत के लिए’

बाड़मेर – जिले के औद्योगिक हब बनने जा रहे पचपदरा राजनीति का नया अखाड़ा बन गया है। वसुंधरा राजे की राजस्थान गौरव यात्रा की सभा पचपदरा में बेदम रहने के बाद महज सात दिन बाद कांग्रेस संकल्प रैली के जरिये हुनका भर रही है, तो 22 सितम्बर को स्वाभिमान रैली के जरिये मानवेन्द्र सिंह दम ठोकेंगे। संकल्प रैली के लिए आज कांग्रेस की सभा में भारी भीड़ जुटने वाली है। यह संकेत है परिवर्तन का। संकल्प रैली के प्रति आम जन का उत्साह रैली से पूर्व साफ दिख रहा है। लोग रैली में पहुंचने शुरू हो गए। प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने जो टीम तैयार की वो दमदार दिखती है। संकल्प रैली की सफलता सचिन को और भरोसेमंद बनाकर उभरेगी।

युवाओ के भरोसे सचिन काफी आगे बढ़ गए। अशोक गहलोत अब वरिष्ठ नेता की भूमिका में है। अब गहलोत भी मान चुके है कि उनका कद राष्ट्रीय स्तर का है। वही जिम्मेदारी संभालनी है। कल फलोदी में मानवेन्द्र सिंह के कांग्रेस में प्रवेश के सवाल पर सपाट बयान दिया कि प्रदेश स्तर का मामला है वही जवाब देंगे। गहलोत किंग मेकर उभरना चाहेंगे। बाड़मेर की सात विधानसभा सीट पर दावेदारों की भरमार है।।दावेदारों की भीड़ से भी सचिन को निपटाना है। की दावेदार तो इसीलिए दावेदारी कर रहे है कि वो पार्टी के पुराने कार्यकर्ता है। जनाधार कुछ नही।।सचिन को नए चेहरों पर भरोसा कर उन्हें जनता के बीच लाना होगा।

पुराने नेताओ से जनता ऊब चुकी है। तीन दशकों से एक ही चेहरे। जनहित से कोई सरोकार नही। आने वाले दिनों में भाजपा और कांग्रेस में उठापटक होंगे। राजनीतिक समीकरण बदलेंगे। दो मार्शल समाजो को एक ही पार्टी में हैंडल करना आसान नही होगा। भाजपा छोड़ने वालो और कांग्रेस जॉइन करने वालो की तादाद ज्यादा रहेगी, ऐसे में संतुलन बनाना भी सचिन के लिए चुनौती होगी। बाड़मेर में कई युवा कांग्रेस की राजनीति में दमदार प्रवेश कर चुके है। बदलते जातिगत समीकरणों में इन्हें फिट करना भी चुनोती होगी। संकल्प रैली को लेकर सभी की निगाहें इस पर टिकी है।

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