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उठावने के अंतिम दिन पूरी हुई पिता की अंतिम इच्छा, पुत्र बना निर्विरोध सरपंच

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कोशीथल के निर्विरोध सरपंच बने नवरतन सालवी

कोशीथल/भीलवाड़ा – भीलवाड़ा जिले की कोशीथल ग्राम पंचायत के सरपंच पद पर नोरतन (नवरतन सालवी) को निर्विरोध सरपंच घोषित किया है। आपको बता दे कि कोशीथल के सरपंच पद के लिए 3 नामांकन पत्र प्रस्तुत किए गए थे जिनमें से सुरेश चंद्र रेगर व राजमल रेगर ने नवरतन सालवी सालवी के पक्ष में अपने नामांकन वापस ले लिए पीछे केवल नवरतन सालवी का आवेदन ही बचा। ऐसे में नवरतन सालवी को ग्राम पंचायत का सरपंच घोषित कर दिया। इस मौके पर ग्राम पंचायत कार्यालय परिसर ग्रामीणों व समर्थकों का भारी जमावड़ा हो गया।
सरपंच बनने पर कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष राजेन्द्र त्रिवेदी, हर्षवर्धन सिंह चुण्ड़ावत (राजा बन्ना), रायपुर के पूर्व सरपंच कुलदीप त्रिवेदी सहित सैकड़ों गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। ग्राम पंचायत से स्वर्गीय मोहन लाल ठेकेदार के निवास स्थान तक रैली निकाली गई। रैली के निवास पर पहुंचने के बाद नवरतन सालवी व राजा बन्ना ने सुरेश चंद्र रेगर, राजमल रेगर व समस्त ग्रामवासियों का आभार व्यक्त किया।
आपको बता दे कि नवरतन सालवी पूर्व कांग्रेस ब्लाॅक अध्यक्ष मोहन लाल ठेकेदार के तीसरे नम्बर के पुत्र है। हाल ही में 3 जनवरी 2020 की रात को करीब 10.30 बजे मोहन लाल सालवी देहांत हुआ था। इस बार पंचायतीराज चुनाव में वे अपने तीसरे नम्बर के पुत्र नोरतन को कोशीथल ग्राम पंचायत के सरपंच पद का चुनाव लड़ाना चाहते थे। ये उनकी दिली तम्मना थी। इसके लिए उन्होंने गांव के लगभग हर समाज के मौतबीर लोगों से पहले ही बात कर ली थी। चूंकि नोरतन गत कार्यकाल में वार्ड पंच रहा था। साथ ही बंकेश्वर भारत गैस वितरक एजेंसी के संचालन से गांव के हजारों गैस उपभोक्ताओं से नोरतन के सीधे सम्पर्क है। इस कारण उन्हें लग गया था कि नोरतन चुनाव लड़कर सरपंच पद जीत सकता है। ये उनकी दूरदृष्टि थी। विगत 6 माह से वे बंकेश्वरी निवास के बाहर नीमड़ी (नीम का पेड़) के नीचे बैठकर आते जाते लोगों से नोरतन के लिए समर्थन जुटा रहे थे।
वे शुगर के मरीज थे। रोजाना इंसुलिन के इंजेक्शन लेते थे। शुगर के कारण हार्ट डिजीज हो चुकी थी। 3 साल पहले अहमदाबाद में ओपन हार्ट सर्जरी करवा चुके थे। शुगर ने किड़नी पर घातक असर कर दिए थे। 23-24 दिसम्बर 2019 को उनके शरीर पर खुजली चलने लगी थी। 25 दिसम्बर को उन्हें उदयपुर के जे.के. फोर्टिस अस्पताल में ले जाया गया। वहां उसी दिन उन्हें एडमिट कर दिया। ड्रीप से लगातार इंसुलिन दिया गया लेकिन शुगर 400-500 से नीचे नहीं उतरी। डायलिसिस भी किया गया लेकिन सुधार नहीं हुआ। क्रेटिना भी 9.5 से अधिक था। लेकिन वे अपने आप को चंगा महसूस कर रहे थे। दोनों टाइम अपने हाथ से खाना खा रहे थे। खोखले हो चुके शरीर की बगैर चिंता किए वे मोबाइल फोन से गांव के अपने मित्रों को कॉल कर नोरतन को सरपंच चुनाव जीताने की रणनीति पर चर्चाएं कर रहे थे। वे रोजाना गांव के कई लोगों से फोन पर बातें कर रहे थे लेकिन 3 जनवरी की रात को महज 3 मिनिट के लिए उन के पेट में दर्द हुआ और फिर उनका शरीर ठण्ड़ा पड़ गया।
14 जनवरी को उनके देहांत को 12 दिन पूरे हुए। ये बैठक का अंतिम दिन था और स्व. मोहन लाल ठेकेदार की अंतिम इच्छा भी पूरी हो गई। 13 जनवरी को कोशीथल ग्राम पंचायत के पंच-सरपंच पद के लिए नामांकन पत्र भरे गए थे। सरपंच पद के लिए नोरतन ने नामांकन पत्र जमा कराया। दोपहर 2 बजे तक सरपंच पद के लिए दूसरा कोई नामांकन दाखिल नहीं हुआ। कोशीथल ग्राम पंचायत के चुनाव के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। पंचायत परिसर में सैकड़ों लोग जमा थे। सभी नोरतन को निर्विरोध सरपंच बनाने की बातें कर रहे थे। स्व. मोहन लाल ठेकेदार ने 1995 में सरपंच का चुनाव लड़ा था, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी चुनाव जीत न सके। इसके बाद 2000 में पंचायत समिति का चुनाव लड़ा, तब भी लोगों ने मंडेंट नहीं दिया।
13 जनवरी 2020 को सुरेश रेग़र ने भी सरपंच का नामांकन पत्र पेश किया, इससे पहले गांव के लोग उसे समझाने लगे। लोगों के अलग-अलग समूहों ने सुरेश रेगर को खूब समझाया लेकिन वो मानकर भी नहीं माना और अपना नामांकन पत्र पेश कर दिया। उसके बाद गांव के एक युवा समूह के समर्थन से राजमल रेगर ने पर्चा दाखिल कर दिया। शाम 5 बजे तक सरपंच पद के लिए कुल 3 और 15 वार्डो के लिए कुल 52 लोगों ने पर्चे दाखिल किए।
दोनों प्रतिद्वंद्धियों का आंकलन करने के बाद नोरतन के सभी समर्थक जीत को लेकर निश्चिंत थे। लेकिन गांव के सैकड़ों लोग तो जैसे नोरतन को निर्विरोध सरपंच बनाने की ठान चुके थे। सब अपने अपने स्तर पर सुरेश व राजमल को नामांकन पत्र उठाने के लिए मना रहे थे। अंततः मेहनत रंग लाई और राजमल रेगर ने अपना नामांकन पत्र वापस ले लिया। नाम वापसी का समय 3 बजे तक का ही था, 2.15 बज चुके थे। लेकिन अभी तक सुरेश रेगर ने नामांकन वापस नहीं लिया था। अचानक गाडियों का काफिला आया। राजा बन्ना, कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष राजेन्द्र त्रिवेदी, रायपुर के पूर्व सरपंच कुलदीप त्रिवेदी, दिनेश दाधीच सहित कई लोगों के साथ सुरेश रेगर पंचायत में एंटर हुआ और नामांकन वापस ले लिया।
अनोखा मंजर था, एक तरफ स्व. मोहन लाल ठेकेदार के घर पर उनकी आत्मा की शांति के लिए धूप दिया जा रहा था वहीं दूसरी ओर लोगों की अरदास पूरी हो रही थी, ग्राम पंचायत में नोरतन के गले में निर्विरोध सरपंच बनने की माला पहनाई जा रही थी। अंततः स्व. मोहन लाल ठेकेदार की अंतिम इच्छा पूरी हो गई।

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