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तो टिकट वितरण की बंदरबाट देख ली आपने ? अब आखिरी तारीख के बाद क्लियर होगी पिक्चर

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लखन सालवी

आज नामांकन का आखिरी दिन था। राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर सीटों पर टिकट बंटवारे को लेकर राजनीतिक पार्टियों में उथल पूथल हो रही है। टिकट नहीं मिलने पर भाजपा के नेता कांग्रेस पार्टी ज्वॉइन कर रहे है वहीं कांग्रेस के नेता के भाजपा का दामन थाम रहे है। कई नेता बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए नामांकन कर चुके है। इतनी उठा पटक है लोकतंत्र के इस पर्व पर जनता कभी इधर तो कभी उधर देख रही है। इस चुनावी समर में राजनीतिक पार्टियां विपक्ष के पैंतरों से नहीं बल्कि अपनों के ही पैतरों से अधिक चिंतित हो रही है।

कल महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष व कांग्रेस की नेता रही ममता शर्मा ने पार्टी बदली ली। उन्होंने वसुंधरा राजे के निवास पर भाजपा की सदस्यता ले ली। वो बूंदी से दो बार विधायक रही थी तथा इस बार अपने पुत्र समृद्ध शर्मा को कांग्रेस का टिकट दिलवाना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस ने समृद्ध को टिकट नहीं दिया तो उसने कांग्रेस पार्टी ही छोड़ दी। वहीं भाजपा ने ममता शर्मा के पुत्र को पीपल्दा सीट का टिकट दे दिया।

उधर कांग्रेस के इत्यराज सिंह का टिकट कटा तो वे उनकी पत्नी भाजपा में शामिल हो गई उन्हें भी भाजपा से टिकट मिल गया। घुमन्तू व अर्धघुमन्तू कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष रहे शाहपुरा (भीलवाड़ा) के गोपाल केसावत शाहपुरा से प्रबल दावेदारी कर रहे थे, उन्हें टिकट नहीं दिया गया तो उन्होंने आप का दामन थाम लिया।

इस सेषन में इस दल बदल की शुरूआत पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र सिंह ने की। मानवेन्द्र सिंह ने वसुंधरा राजे की मंषा को भांपते हुए दिल्ली की दौड़ करते हुए राहुल गांधी से मिला लिया। उनके बाद लगातार कई नेता जो बरसों तक किसी एक पार्टी के गुणगान करते नहीं थकते थे वे अब अवसरवादी होकर सत्ता सुख लेने के लिए दल बदल रहे है।

कांग्रेस ने बीकानेर पष्चिम की सीट पर पहले यशपाल गहलोत को प्रत्याषी को घोषित किया। उसके बाद बी.डी. कल्ला व उनके समर्थकों की दमदार दहाड़ जब कांग्रेस आलाकमान के कानों में पड़ी तो तुरन्त गहलोत का टिकट काटते हुए बी.डी. कल्ला को टिकट दिया गया। इस प्रकार गहलोत फिर से बेटिकट हो गए।

भाजपा ने कोटा से पूर्व विधायक चन्द्रकला मेघवाल का टिकट काट दिया था, हालांकि चन्द्रकला मेघवाल ने भाजपा के विरूद्ध बिगुल नहीं बजाया लेकिन उनके कार्यकर्ताओं का आक्रोश येन केन प्रकारेण भाजपा आलाकमान तक पहुंच गया। डेमेज कंट्रोल करने के लिए चन्द्रकला मेघवाल को रामगंजमण्ड़ी से टिकट दिया गया।

तो टिकट नहीं दिए जाने से कई नेता अपनी पार्टी को इस्तीफा देकर विपक्षी पार्टी की सदस्यता लेकर तोहफे में टिकट कबूल रहे है वहीं कांग्रेस-बीजेपी ने कई टिकटों पर दावेदार घोषित कर पुनः टिकट काट दिए है। उदयपुर जिले की मावली सीट का टिकट देहात जिलाध्यक्ष लाल सिंह झाला को दिया गया, लाल सिंह झाला द्वारा नामांकन पत्र भर देने के बाद उनका टिकट काट कर पुष्कर डांगी को दे दिया गया।

इस बार राज्य के मतदाता अजीबों गरीब स्थिति है, वे असमंजस में है कि पार्टी के साथ रहे या अपने नेताओं के पीछे जाए। वहीं टिकट वितरण की बंदरबाट को देकर भी हैरान है।

उधर भीलवाड़ा में कभी पक्के दोस्त रहे पूर्व मंत्री राम लाल जाट व पूर्व यूआईटी चैयरमेन रामपाल शर्मा के बीच जबरदस्त दरार साफ दिखाई पड़ती है। जिलाध्यक्ष रामपाल शर्मा माण्डल सीट से दावेदारी कर रहे थे, दावेदारी राम लाल जाट की भी थी, आलाकमान ने अपने अनुरूप दोनों का आकलन कर टिकट राम लाल जाट को दिया। अब टिकट तो राम लाल जाट को मिल गया लेकिन एक ओर दावेदार रहे प्रद्युम्न सिंह ने भी निर्दलीय के रूप में नामांकन पत्र दाखिल कर चिंताएं बढ़ा दी है। राजस्थान में कई सीटों पर बागियों की वजह से गणित बिगड़ सकती है। हनुमान बेनीवाल व घनश्याम तिवाड़ी भी अंततः बीजेपी के लिए ही कार्य करते नजर आ रहे है। अभी की तस्वीर से कुछ भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। अब नामांकन उठाने की अंतिम तारीख के बाद ही पिक्चर थोड़ी क्लियर हो पाएगी।

आप बने रहिए डेली राजस्थान के संग, हम बताते रहेंगे आपको अजीब चुनावी रण के गजब कारनामें।

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