आमजन के लिए आमजन द्वारा

पुलिस इस्तेमाल करे तो उसके लिए बहुत कारगर हथियार साबित हो सकता है सोशल मीडिया, एसपी कुंवर राष्ट्रदीप की पहल मिशाल है

101

अमरपाल सिंह वर्मा

सोशल मीडिया जितना आमजन के लिए उपयोगी साबित हो रहा है, उतना ही इस वजह से नुकसान भी होने लगा है। सोशल मीडिया अफवाहों का एक बड़ा कारण बन गया है। जैसे ही फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प आदि पर कोई मैटर आता है, हम लोग बिना सोचे-समझे उसे आगे फॉरवर्ड कर देते हैं। हाल में मॉब लिचिंग की घटनाएं बढ़ने के पीछे सोशल मीडिया के जरिए फैल रही अफवाहें भी वजहें हैं। सोशल मीडिया का दुरुपयोग न होने पाए, इसके लिए जहां आमजन में जागरूकता लाने की जरूरत है, वहीं इस बात की भी जरूरत है कि पुलिस सोशल मीडिया का डंडे, पिस्तौल, बंदूक, हथकड़ी के इस्तेमाल से पहले करे। जिस प्रकार समाजकंटक सोशल मीडिया को हथियार बना रहे हैं, उसी प्रकार पुलिस को भी इसे एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसा करना आज के समय की जरूरत है।

राजस्थान के पुलिस महानिदेशक पुलिस ओपी गलहोत्रा ने भी हाल में इसी बात पर बल दिया है। जयपुर में पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक कार्यशाला में उन्होंने प्रदेश की सभी पुलिस इकाईयों को सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर इसका बेहतर उपयोग करने के साथ ही सोशल मीडिया की गतिविधियों पर नजर रखने की हिदायत दी है तो इसके पीछे उनकी व्यापक समझ है। वर्तमान परिवेश में सूचनाओं के त्वरित सम्प्रेषण में सोशल मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। सोशल मीडिया के बढ़ते महत्व को ध्यान में रखते हुए इसका उपयोग कर पुलिस सूचना तंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।

अगर हमारे आसपास के परिदृश्य को देखें तो हम छोटे से लेकर बड़े पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते अक्सर देखते हैं। खासकर, युवा पुलिसकर्मी व्हाट्सएप, फेसबुक आदि पर खूब सक्रिय हैं। आवश्यकता सिर्फं इस बात की है कि पुलिस वाले सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता को अपनी ड्यूटी का हिस्सा बना लें। यानी सोशल मीडिया के जरिए भी ड्यूटी करें। जिस प्रकार आम लोग पुलिस के साथ सोशल मीडिया के माध्यम से आवश्यक जानकारियां शेयर कर कर रहे हैं, उस तरह का रवैया पुलिसकर्मी भी अपनाएं। हाल में उदयपुर शहर में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उदयपुर पुलिस ने एक अच्छी पहल की है। यह पहल सोशल मीडिया का सार्थक इस्तेमाल करने के प्रति है। इस काम को जिस तरह से करने की सोची गई है, उससे पुलिस के काम में मदद मिलने की उम्मीद बंधती है। राज्य के सभी जिलों की पुलिस इसका अनुसरण करे तो पुलिस और जनता बड़ा फायदा हो सकता है।

उदयपुर शहर में किसी भी तरह की अफवाह से हालात न बिगड़ें और रात्रि गश्त मजबूत रहे, इसके लिए वहां नए एसपी कुंवर राष्ट्रदीप ने यह पहल की है। उन्होंने थानाधिकारियों को आदेश दिया है कि प्रत्येक बीट कांस्टेबल सोशल मीडिया ग्रुप बनाएगा, जिसमें अपनी बीट के 200 लोगों को जोड़ेगा। बीट में जाने के बाद बीट कांस्टेबल को फोटो भी उसी ग्रुप में पोस्ट करनी होगी।

उदयपुर एसपी का मानना है कि इस तरह पुलिस से करीब 60-70 हजार लोग जुड़ जाएंगे और यदि किसी अफवाह से शहर की शांति भंग होने का अंदेशा होगा, उसकी वास्तविकता उसी ग्रुप में सामने आने के साथ संभावित हालात को टाला जा सकेगा। आदेश के बाद जो बीट कांस्टेबल अपने बीट में नहीं जाते थे, उन्होंने भी जाना शुरू कर दिया है। साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों को ग्रुप से जोडऩे का काम कर रहे हैं।

उदयपुर में एसपी ने रात्रि गश्त कड़ी करने के लिए शहर के 10 थानों के 10 ग्रुप बनवाए हैं, जिनमें वह खुद जुड़े हुए हैं। इन ग्रुप में शामिल अधिकारी से लेकर कांस्टेबल तक जो भी जहां कहीं गश्त कर रहे होंगे, उन्हें हर आधे घंटे में पेट्रोलिंग स्पॉट का फोटो खींचकर ग्रुप में डालना होगा। सख्त आदेश का नतीजा यह है कि इन सभी ग्रुप में रात 12 से लेकर सुबह 5 बजे तक लगातार फोटो भेजे जा रहे हैं। साथ ही एसपी की तरफ से इनका समय भी नोट किया जा रहा है।

यकीनन, इस तरह की कवायद बहुत रंग ला सकती है। राज्य के सभी पुलिस पुलिस थानों के गु्रप इस तर्ज पर बना कर बीट कांस्टेबलों को शामिल कर काम शुरू किया जा सकता है। इससे बीट के प्रति लापरवाह रहने वाले पुलिस कर्मियों को काम के प्रति गंभीर बनाने में मदद मिलेगी। इससे आपराधिक तत्वों की गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सकेगा। अगर अपराधी सोशल मीडिया का दुरुपयोग अपने हितों के लिए कर सकते हैं तो पुलिस उन पर काबू पाने के लिए सोशल मीडिया का सदुपयोग क्यों नहीं कर सकती ?

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com