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राजनेताओं के लिए विशेष : सोशल मीडिया पर बढ़ता राजनीतिक दंगल

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  • मनोज राठौर (लेखक दिल्ली के मीडिया इंस्टीट्यूट में अध्ययनरत है )

कर्नाटक चुनाव के साथ एक बार फिर से राजनीतिक गलियोरों में सरगर्मियां तेज हो गई है। राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर जनता को अपनी ओर करने के प्रयास में है। यूं तो समय के साथ चुनाव प्रचार करने का तरीका भी बदल गया है। सोशल मीडिया इसमें सबसे बेहतर माध्यम बन रहा है। गत लोकसभा चुनाव इसका प्रमाण है। राजनीतिक पार्टियां सोशल मीडिया के द्वारा आसानी से लोगों तक अपनी पहुंच बना रही है। जिसका सीधा लाभ चुनावों में मिलेगा। सोशल मीडिया पर भाजपा के फॉलोअर्स लगातार बढ़ रहे है।

2014 लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर मोदी के भाषण इस तरह से छाए रहे कि लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। जिसका परिणाम हमारे सामने है। हाल ही में त्रिपुर, मेघालय और नगालैंड के चुनाव परिणाम हमारे सामने है। जहां सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए भाजपा लोगों तक पहुंचने में कामयाम रहीं है।

सोशल मीडिया का दायरा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यदि कर्नाटक की बात करे तो डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोग फेसबुक यूजर्स है। जिनमें से सवा चार लाख से ज्यादा लोग भाजपा को फॉलो करते है। कांग्रेस शासित इस राज्य में कांग्रेस को फॉलो करने वालो की संख्या कुछ 33 हजार के लगभग है। कर्नाटक एक डिजिटल राज्य है जहां चुनावी दंगल की वर्चुअल लड़ाई देखने को मिलेगी। भाजपा सोशल नेटवर्किंग के जरिए केंद्र की योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाएगी। साथ ही हिन्दूत्व से जूड़े बूचड़खाना, मांस आदि मुद्दे उछाल कर लोगों को अपनी ओर करने का प्रयास करेगी। इस सब के लिए भाजपा की आईटी व सोशल मीडिया टीम बुथ स्तर तक तैनाथ रहेगी।

कहने को कांग्रेस भी सोशल मीडिया के लिए अपनी टीम तैयार कर चुकी है। ट्विटर पर मेरा कर्नाटक नाम से एक अभियान शुरु किया है। इसके अलावा जिला स्तर पर मीडिया कॉर्डिनेटर भी तैनात है। व्हाट्सअप ग्रुप बनाकर लोगों तक अपनी उपलब्धियों को पहुंचा रहीं है। चुनाव के नतीजे कुछ भी रहे पर सोशल मीडिया का कद बढ़ेगा।

कर्नाटक के बाद राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी चुनाव होने वाले है। यहां भी सोशल मीडिया प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम होगा। राजस्थान की बात करे तो यहां 1.2 करोड़ फेसबुक यूजर्स है। जिनमें से 3.6 लाख यूजर्स भाजपा को फॉलो करते है। वहीं मध्यप्रदेश में एक करोड़ के लगभग फेसबुक यूजर्स है जिसमें से 2.14 लाख भाजपा को और 20 हजार कांगेंस के फॉलोअर्स है। छत्तीसगढ़ में भी फॉलोअर्स के मामले में भाजपा अग्रणी है। यहां 4 लाख यूजर्स है भाजपा को फॉलो करते है। वहीं कुछ 10 हजार कांग्रेस को फॉलो करते है। इसके अलावा भाजपा के सांसद-मंत्रियों को सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने को कहा गया है। पार्टी से लेकर मंत्रियों व सांसदो के पेज बने हुए है। इस मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज सबसे ज्यादा सक्रिय है। इस तरह लाखों लोग भाजपा को ट्विटर, इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाटसअप के जरिए फॉलो करते है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जिस पार्टी के जितने ज्यादा फॉलोअर्स होगें, उसकी पहुंच ज्यादा लोगों तक होगी। चुनाव के समय में इसका लाभ पार्टी को मिलेगा।

सोशल मीडिया के मामले में अन्य राजनीतिक दलों के मुकाबले भाजपा का नेटवर्क सबसे बड़ा है। इंटरनेट पर बीजेपी लाइव नाम का चैनल है जिसको हर रोज 10 लाख से ज्यादा लोग देखते है। साथ ही पार्टी का बीजेपी फॉर इंडिया नाम से अपना यूट्यूब चैनल है जिसे हर महिने औसतन 10 करोड़ से ज्यादा लोग देखते है। वहीं ई-मेल के जरिए पीएम मोदी, अमित शाह सहित आला नेताओं के प्रेस कॉफ्रेंस लाखों-करोड़ों लोगों तक भेजी जाती है। इसके अलावा बीजेपी नेता फेसबुक पर लाइव चैट भी करते है। इससे पहले गुजरात चुनाव में भाजपा ने सोशल मीडिया के लिए एक टीम बनाई थी। गुजरात की राजधानी गांधीनगर के प्रदेश कार्यालय में एक हाईटेक सोशल मीडिया वॉर रुम तैयार किया था।

आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए भाजपा दिल्ली में दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर अपने नए हाईटेक कार्यालय का उद्घाटन कर चुकी है। 8000 स्वकायर मीटर में तीन मंजिला बने इस कार्यालय में 70 कमरे है। इसमें पार्टी अध्यक्ष, लोकसभा में पार्टी नेता, राज्यसभा नेता व सभी महासचिवों के कमरे है। साथ में दो ऑडिटोरियम है जिनमें क्रमश 450 और 150 लोगों की क्षमता है। कार्यालय में सभी तरह की आधुनिक टेक्निकल सुविधाएं होगीं।

वर्ष 2018 में होने वाले कर्नाटक, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के चुनावों में भाजपा और कांग्रेस दो बड़े दल है। जो सत्ता के लिए आमने-सामने होगें।

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