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मारवाड़ में रेती ही रेती ! और यहां के किसान कर रहे है चावल की खेती !

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Baran : राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 27 पर कोटा से आगे चलने पर हाइवे के दोनों ओर जहां तक नजरें जाती है वहां तक लम्बे-लम्बे खेत है। खेतों में धान की फसल खड़ी है, वहीं खेतों में पानी भरा है। यह पानी फसल पकने से पहले तक भरा रखना होगा। किसान उम्मीद पर खेती करते है और इस बार उनकी उम्मीद पूरी होती दिखाई पड़ रही है।

वागड़, मेवाड़ और मारवाड़ में भले की पानी नहीं बरसा है लेकिन हाड़ौती में अच्छी बारिस हुई है। हाड़ौती में बहने वाली चम्बल, काली सिंध, पार्वती, सूखा, सिरसा व पिंडासिल जैसी नदियां बहती है। चम्बल, काली सिंध व पार्वती नदी यहां के किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पानी की प्रचूरता के चलते यहां के किसानों का रूझान चावल की खेती की ओर अधिक रहता है। इसी की बानगी है कि जहां देखो वहां खेतों में धान की फसलें बोई जा रही है। खेतों के सीने पर भरे पानी जमीन की गर्म तासीर ठण्ड़ी पड़ चुकी है। कोटा, सिमलिया, अंता, बारां, किशनगंज, भंवरगढ़, नाहरगढ़, केलवाड़ा, समरानियां सहित कई क्षेत्रों में चावल की फसल बोई गई है। पिछले दो दिनों से इन क्षेत्रों में अच्छी बारिस हो रही है जिससे यहां चावल की अच्छी पैदावार होने की पूरी संभावनाएं है।

 

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