आमजन के लिए आमजन द्वारा

जीवन में शिक्षा गुरू अनेक हो सकते है परंतु दीक्षा गुरू एक होता है : पंडित भार्गव

20

सौरभ जैन/सुनेल/झालावाड़ – सुनेल क्षेत्र के कनवाड़ा-कनवाड़ी में स्थित रामकुण्ड बालाजी मंदिर में चल रहे धार्मिक मेले के तहत श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन शुक्रवार को मध्यप्रदेश के बिनागंज के पीपलखेड़ी के पंडित शिवदयाल भार्गव ने कंहा कि भागवत एक विज्ञान है, अनन्त गहराई में मोती मिलते है। शरीर के अंदर ठाकुर विराजमान है। सुदामा चरित्र के बारे में बताया कि ब्राह््राण वह होता है जो पूर्ण संतुष्ट होना चाहिए। किसी के प्रति भेद का भावना नहीं हो, वह ब्रह््राण है। सुदामा की पत्नी ने कभी शिकायत नही की। जैसी भी परिस्थिति में अपना समय निराला है, परमात्मा कभी किसी को गरीबी नही दे, गरीबी से सभी रिश्तेदार व सगे भी भूल जाते है, भगवान के दर्शन करने से दीव भी आंखों में देखी दीन का अपमान नहीं करना चाहिए। वाणी ही तो सगे को पराया बना देती है। सब अपने के लिए करते है लेकिन पराये के लिए भी करें, मित्र से मांगा नहीं जाता।

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण ने मित्रता में अमीरी-गरीबी की दीवार तोड़ दी, धनवान से धनवान मिले तो करे लंबी बात और गरीब पड़े पहाड़ से तो कोई ना पूछे बात, भगवान अपने मित्र को ह््रदय से लगाकर उदात्त ह््रदय का परिचय दिया, सुदामा याने संयम अभाव में भी प्रसन्न रहने का गुण केवल सुदामा में ही है। सुदामा की पत्नी भी धन्य है जो कभी भी कोई शिकायत नहीं करती, पति के पास धन हो और कोई स्त्री अपने पति की सेवा करे तो कोई बड़ी बात नहीं, गरीबी में भी साथ दे वह स्त्री महान है।

पंडित भार्गव ने कहा कि अमीरी गरीबी दोनों ही अवस्था में भगवान का भजन करना चाहिए, हमें जो कुछ भी मिला है वह भगवान से ही मिला, जीवन पुरूषार्थी होना चाहिए, बिना पुरूषार्थ के सफलता नई मिलती, मेहनत ही सफलता की कुंजी है, सत्संग ही मानव मात्र के कल्याण का स्वरूप है, गुरू शरण के बिना कल्याण नही होता, जीवन में शिक्षा गुरू अनेक हो सकते है परंतु दीक्षा गुरू एक होता है, कथा के बिना मोक्ष नही मिलता, सप्ताह कथा से परीक्षित को मोक्ष मिला। इस दौरान पंडित भार्गव ने संगीतमय भजन सुनाए तो श्रद्वालु झूम-झूमकर नाचने लगे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com