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थार की राजनीति में युवाओं की दस्तक, जानिए राजनीति के नए नायकों से

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चन्दन सिंह भाटी/बाड़मेर – पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में आचार संहिता के बाद राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई। लम्बे समय बाद बाड़मेर की राजनीति में बदलाव की बयार चली है। लगभग तीस साल से नए युवाओं की राजनीति में कोई एंट्री नही हुई। कुछ युवाओं ने प्रयास किया था मगर स्थापित नेताओं के आगे उन्हें मौका नही मिला। कल के युवा आज दौड़ से भी बाहर हो गए। मगर इस बार थार की राजनीति में युवाओं का जोश हिलोरे मार रहा है। कई सालों से आम जनता और युवा एक ही एक चेहरे को देख उकता गई है। आज के युवा राजनीति में पढ़े लिखे, सकारात्मक सोच के युवाओं का प्रवेश चाहते है। बाड़मेर की राजनीति में आज उन युवाओं की चर्चा करेंगे जिन्होंने कम समय में जनता के बीच अपनी खासी पेठ जमा ली। आज वो प्रमुख पार्टियों के दावेदार बन गए। जनता के युवा नेता कहे तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी। जिले के चार युवाओं से आज रूबरू करवा रहे जिनसे जिले की जनता को उम्मीदें है।

1. आज़ाद सिंह राठौड (बाडमेर – कांग्रेस)

Azad Singh

बाड़मेर के कोई डेढ़ साल पहले सामाजिक ग्रुप, ग्रुप फ़ॉर पीपुल के अध्यक्ष बने तब से लगातार चर्चा में है। कॉर्पोरेट जगत से नाता रखने वाले आज़ाद सिंह राठौड़ विभिन संगठनों खास कर खेल संगठनों से सीधे जुड़े है। जिला क्रिकेट संघ से लम्बे समय से जुड़े है। हाल ही में उन्होंने आरसीए के कोषाध्यक्ष का चुनाव लड़ा। मात्र चार मतों से हार गए मगर बाद में जीते उम्मीदवार का न्यायालय ने चुनाव निरस्त कर इन्हें कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। गरीबों और असहायों की मदद के लिए तत्पर रहने वाले आज़ाद सिंह राठौड़ के बाड़मेर के युवा दीवाने है। राजनीति में रुचि रखने वाले आज़ाद ने एक माह की कड़ी मेहनत के बाद कांग्रेस पार्टी में अपना खास मुकाम बना लिया। लोगों से सीधा संपर्क, आत्मीय व्यवहार, सकरात्मक सोच, उच्च स्तरीय शिक्षित, विभिन समाजों में पकड़, इनकी खास पहचान है। युवाओं में खासे लोकप्रिय राठौड़ बाड़मेर विधानसभा क्षेत्र से अपनी दावेदारी कर रहे। कांग्रेस के लिए आज़ाद सिंह किसी बोनस से कम नही। प्रतिष्ठित परिवार से होने के साथ इनकी राजनीति सोच और समझ गजब की है। पूर्व मंत्री दिग्गज किसान नेता हेमाराम चौधरी के नजदीक माने जाते है। छह माह की अवधि में इन्होंने बाड़मेर विधानसभा के अमूम्मन हर वोटर के पास पहुँच बनाई है। दमदार युवा नेता के रूप में अपनी खास पहचान बनाने वाले आज़ाद बाड़मेर में टिकट के लिए वर्तमान विधायक मेवाराम जैन को कड़ी टक्कर दे रहे। कम समय से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट का बिश्वास हासिल करने में भी कामयाब हुए है। इन्होंने कारगिल पर पुस्तक लिखी जो बहुत चर्चित हुई।

2. पीयूष डोशी – (बाडमेर – बीजेपी)

Piyush Doshi

थार की राजनीति में डोशी परिवार का अहम योगदान रहा। समाजसेवी और भामाशाह के रूप में विख्यात रहे राजनेता भगवानदास डोशी की पचास साल की राजनीति के उत्तराधिकारी के रूप में उनके पौते पीयूष डोशी सफलतम व्यवसायी होने के साथ एक बेजोड़़ युवा रणनीतिज्ञ है। लम्बे समय से भाजपा के साथ जुड़े पीयूष डोशी बीटेक तक शिक्षित है। मिलनसार, मृदुभाषी होने साथ इनकी आमजन में अच्छी पकड़ है। पीयूष अपने दादा के दो चुनाव में खुद भागीदार रहे। चौहटन से जब भगवानदास चुनाव लड़े तब कमान पीयूष के पास थी। जिसके चलते इनकी राजनीति और मतदाताओं पर अच्छी पकड़ के साथ चुनावी क्षेत्र को भली भांति परखे हुए है। वसुंधरा राजे की परिवर्तन यात्रा जब चोहटन गई तब यात्रा की तैयारियों में उनकी अहम भूमिका थी वहीं इस बार गौरव यात्रा में बाड़मेर में सभा को सफल बनाने में मंत्री राजेन्द्र राठौड़ और प्रो. महेंद्र सिंह राठौड़ के साथ उनकी अहम भूमिका रही। भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़ कर राजनीति सफर शुरू करने वाले पीयूष डोशी बाड़मेर के हॉट युवा उम्मीदवारों में शुमार हो चुके है। बाड़मेर के जातिगत समीकरण उनके पक्ष में है। जैन होने के चलते मतदाताओं का विश्वास इन्हें हासिल हुआ है। भाजपा के सहकारिता और व्यावसायिक प्रकोष्ठ में अहम जिम्मेदारी के पदों का निर्वहन कर रहे है। युवा सोच के हिमायती पीयूष डोशी बाड़मेर विधानसभा क्षेत्र से दमदार युवा प्रत्याशी के रूप में उभरे है। डोशी सामाजिक सरोकार से जुड़ी गतिविधियों को अंजाम देते रहते है। जरूरतमंद लोगों की मदद करने के साथ निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन भी करते है। इनके द्वारा अकाल और बाढ़ के दौरान पीड़ितों की सहायता आज भी लोग याद करते है। नए चेहरे की तलाश में जुटी भाजपा की तलाश पीयूष डोशी पर खत्म हो सकती है।

3. धन सिंह मौसेरी (शिव – बीजेपी)

Dhan Singh Moseri

युवा राजनीति में एकाएक शिव विधानसभा क्षेत्र से सशक्त दावेदार के रूप में विनोबा भावे और स्वामी विवेकानंद के आदर्शों के हिमायती धन सिंह उभर कर सामने आए। राष्ट्रवादी विचारों और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से इनका सीधा जुड़ाव इन्हें एक उम्मीदवार के रूप में ऊंचाई देता है। ओबीसी वर्ग से होने के साथ ही इनकी पकड़ शिव विधानसभा क्षेत्र के जन-जन तक है। सीमा जन कल्याण समिति से जुड़ कर कई साल से सरहदी गांवों में अकाल प्रबंधन के कार्यो के माध्यम से जन सेवा में जुटे है। सकारात्मक सोच और जनसेवा के जुनून ने उनकी खास पहचान बनाई। शिव विधानसभा क्षेत्र में समाज के साथ अन्य समाजों का अच्छाखासा समर्थन मिल रहा है। धन सिंह साधारण किसान परिवार से होने के कारण आम आदमी के मर्म और जरूरतों को अच्छे से समझते है। भूमिहीन परिवारों को जमीन आवंटन कराकर उन्हें अधिकार दिलाने का इन्होंने सपना देखा है। पाक विस्थापित परिवारों को जमीन आवंटन के साथ मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना इनकी प्राथमिकता में शामिल है। सरहदी क्षेत्र से होने के कारण पशुपालकों की समस्याओं को भी भली भांति जानते है। भेड़ बकरियों को फेमिना कोड में शामिल करवाना इनका एजेंडा है। युवा सोच और बदलाव के प्रतीक के रूप में धन सिंह मौसेरी युवाओं के आदर्श है और शिव विधानसभा से प्रबल और सशक्त दावेदार है।

4. शम्मा बानो (शिव – कांग्रेस)

Samma Bano

थार के दिग्गज राजनीतिज्ञ सीमांत गांधी के नाम से मशहूर और 9 बार विधायक रहे महरूम अब्दुल हादी की बहू शम्मा बानो क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय है। कांग्रेस से जुड़े इस परिवार को राजनीति विरासत में मिली। अल्पसंख्यक वर्ग से होने के साथ-साथ उच्च शिक्षित होने के कारण शम्मा बानो युवा महिला राजनीति का चर्चित चेहरा है। प्रदेश महिला कांग्रेस की सचिव के पद पर कार्यरत शम्मा बानो वर्तमान में जिला परिषद सदस्य है। वो चौहटन पंचायत समिति की प्रधान भी रही। अपने प्रधान कार्यकाल में लोगों के कार्य खूब किये जिससे लोगों का उन पर अटूट भरोसा है। चूंकि इनका क्षेत्र चौहटन रिजर्व सीट में आ गया परिसीमन के बाद। गत बार इन्होंने शिव विधानसभा क्षेत्र से दावेदारी की थी। मगर कामयाबी नहीं मिली फिर भी वो पार्टी कार्यक्रमों और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय रही। कांग्रेस के कई अधिवेशनों में भाग ले चुकी है। राहुल गांधी ने इन्हें लेडी ऑफ थार का नाम दिया। इस बार भी शम्मा बानो शिव विधानसभा से अपनी दावेदारी पेश कर रही। गत पांच साल से शिव क्षेत्र में वो काफी सक्रिय रही। इनके पति गफूर अहमद श्रम कल्याण बोर्ड के चेयरमैन भी रहे है। क्षेत्र में हादी परिवार के प्रति आज भी दीवानगी का आलम है। युवाओं को बागडौर देने की पहल पर शम्मा बानो एक आदर्श प्रत्याशी हो सकती है। वैसे भी इस मरुस्थलीय इलाके में महिलाए राजनीति से कोसो दूर रहती है। शम्मा बानो थार की महिलाओे की सशक्त आवाज़ बन सकती है। काबिल होने के साथ उनका राजनीति अनुभव उनमे संभावना जगाता है। शिव से वेटरन नेता अमीन खान भी सशक्त दावेदार है मगर गत चुनावव में तीस हजार से हार और सत्तर साल से अधिक उम्र के कारण उन्हें संगठन में कहीं काम लेने के साथ शिव में शम्मा खान को आजमाया जा सकता हैं।

5. पुराराम मेघवाल (चौहटण – बीजेपी)

Pooraram meghwal

भारत पाक सीमा पर छोटे से गांव मेहरानगढ़ के मूल निवासी अनुसूचित जाति से सम्बन्ध रखने वाले पुराराम मेघवाल भाजपा के चौहटन से सटीक युवा दावेदार है। गत विधानसभा चुनावों में इनका नाम पैनल में गया था। संघ पृष्ठभूमि के होने के कारण शुरू से भाजपा से इनका जुड़ाव रहा। प्रदेश स्तर के नेताओं के विश्वशनीय पुराराम आरक्षित सीट अनुसूचित जाति चौहटन से भाजपा की दावेदारी कर रहे। मेघवाल प्रतिभावान है गांव में पांचवी कक्षा में उतीर्ण होने के साथ इन्हें जोधपुर की सर्वाधिक प्रतिष्ठित स्कूल चौपासनी में प्रवेश मिला। उच्च स्तर की शिक्षा दिल्ली यूनिवर्सिटी में हासिल करने के बाद स्कॉलरशिप के जरिये मॉस्को में उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की। चौहटन के निवासी होने के कारण मेघवाल समाज में उनकी अच्छी पकड़ है। युवा सोच और लोगों के साथ सीधे संपर्क के कारण क्षेत्र में काफी लोकप्रिय भी है। आम जरूरतमन्दों की सहायता के साथ-साथ लोगों की विविध सामाजिक कार्यो में मददगार है। रणकपुर में भाजपा की मीटिंग में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने खासतौर से इनकी तारीफ की थी। लम्बे समय से क्षेत्र में जनसेवा के माध्यम से लोगों से जुड़े होने के व स्थानीय होने के कारण क्षेत्र की समस्याओं से भली भांति परिचित है। पुराराम मेघवाल भाजपा से जुड़े होने के कारण चौहटन से अपनी दावेदारी कर रहे है। उन्हें अच्छा खासा समर्थन भी मिल रहा। बाहरी प्रत्यासियों के मुक़ाबले पुराराम सशक्त है। संभावनाओं से भरा चेहरा है।

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