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क्या ऐसे विस्तार हो पायेगा आयुर्वेद का ! मांगों को लेकर विद्यार्थियों ने दिया ज्ञापन

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गोगुन्दा/उदयपुर – भारत के इतिहास में आयुर्वेद के ज्ञाताओं के सशक्त हस्ताक्षर मौजूद है। वाग्भट्ट, चरक जैसे ज्ञाताओं ने चरक संहिता, अष्टांग संग्रह, अष्टांग हृदय जैसे ग्रंथों की रचना कर न केवल आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को भारत में पहचान दिलवाई बल्कि आयुर्वेद के मामले में पूरे विश्व का लौहा मनवाया।

विगत कुछ वर्षों से सरकारों ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक कदम उठाए है लेकिन इन कदमों की गति की कमी व शिथिलता के कारण आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति अभी भी उस मुकाम पर नहीं पहुंच पाई है, जहां उसे होना चाहिए।  आज आयुर्वेद संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले कला आश्रम में अध्ययनरत बीएमएस के छात्र-छात्राओं ने सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया।

कस्बे के समीप संचालित कला आश्रम मेडिकल आयुर्वेद कॉलेज में अध्ययनरत बीएमएस के विद्यार्थी चौगान में एकत्र हुए। सभी विद्यार्थियों ने अपनी भुजाओं पर काली पट्टी बांध कर सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाकर प्रदर्शन किया।

आपको बता दे कि आयुर्वेद विभाग में पदौन्नति के कारण आयुर्वेद चिकित्सक के मूल पद समाप्त-से हो गए है। ऐसे में चिकित्सकों के पदों को पुनर्जीवित करने व रिक्त पदो के लोप को रोकने की प्रमुख मांग की गई। साथ ही आयुष्मान भारत योजना में संचालित हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर्स पर आयुर्वेद चिकित्सकों के पदस्थापन तिा संविदा पर लगे आयुर्वेद चिकित्सकों की मानदेय विसंगति दूर करने की मांग की गई।

विद्यार्थियों ने बताया कि पदोन्नति की विसंगति के कारण बेरोजगार आयुर्वेद स्नातकों में भारी रोष है। उन्होंने बताया कि पदोन्नति प्रक्रिया में आयुर्वेद विभाग के लगभग आधे मूल पदों को समाप्त कर दिया गया है। पहले इन पदों की संख्या 4438 थी, जिसे घटाकर अब 2300 कर दिया गया है। वहीं राज्य में आयुर्वेद चिकित्सों के 1000 से अधिक पद रिक्त है।

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