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शह और मात में उलझा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का नाम, अश्वमेघ का घोड़ा राजस्थान में ना रूक जाए

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अशोक जैन

शतरंज के खेल वाले शह और मात के बीच अटक गया है राजस्थान भाजपा अध्यक्ष के नाम की घोषणा का मामला। आज प्रदेशाध्यक्ष की खाली कुर्सी का 12वां दिन है और अभी इसमें पूरा महीना बीतने के आसार हैं। कर्नाटक चुनाव तक टले इस घटनाक्रम में कई चालें चली जाएंगी लेकिन सारे खेल में मोहरा बन गए ताजे-ताजे ताजपोशी कराने के लिए सेहरा बांध कर निकले गजेन्द्र सिंह शेखावत, जो आसानी से मैडम के पैंतरे के शिकार हो गए। प्रदेशाध्यक्ष अब कोई बने प्रदेश की राजनीति में शेखावत पूरी तरह नेपथ्य में चले गए हैं। जिसने पहले से ही नाराज राजपूतों के आग में घी का काम किया है।

ताजपोशी को लेकर अब भी जारी कश्मकश में शेखावत के नाम पर पहले ही दिन बवाल को प्रदेश भाजपा ने यूं बढ़ाया कि केन्द्रीय नेतृत्व उसे भांप नहीं पाया। फिर शुरु हुआ प्यादे, हाथी, ऊंट और घोड़े की ढ़ाई घर की चाल से लेकर वजीर का बादशाह को छोड़ के निकलने का दौर। हालात फिर भी काबू से बाहर दिखे तो बादशाह (महारानी) को मोर्चे पर आना पड़ा आखिर में बाजी पलट गई और मोर्चेबंदी या किलेबंदी कागजों के पुलंदे से एक झटके में नेस्तनाबूद हो गई भले ही नजर आ रही हो, अंदर दोनों ओर तूफान जारी है।

आपके इस खादिम ने महज दो दिन पहले ही लिखा था कि भाजपाई इस घरेलु महाभारत में होगा वही जो “मैडम“ रचि राखा। और अंत पंत हुआ भी वही। यह भी लिखा था, नेतृत्व का एक भी गलत कदम आगे सब मटियामेट कर देगा। ऐसा होने से बाल बाल बचे ही कहा जाएगा। महारानी की हठ ने, राज हठ को फिलहाल जैसी पटखनी दी है शायद देश के किसी सूबे के मुखिया द्वारा देना तो दूर सोचने की हिमाकत भी नामुमकिन है।

देश के 19 राज्यों में भगवा फहराने वाली पार्टी के प्रमुख शीर्ष द्वय के लिए यह चुनौती नहीं बल्कि आत्मावलोकन की नई पहल है। जिसे समय रहते नहीं समझा गया तो मिशन 2019 के अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा राजस्थान में ही थम जाने के संकेत मान लें तो भी क्या हर्ज है।
इधर अपने राजनीतिक वजूद की महती जंग जीत कर मुख्यमंत्री राजे ने फिर साबित कर दिया कि राजनीति की शतरंज में उनकी हैसियत बादशाह वाली है और ’किंग’ को पटखनी या मात देने के लिए नौसिखियों को रियाज करने की जरुरत है। केन्द्रीय नेतृत्व की हालत सांप-छछूंदर वाली कर चुकी राजे अब चुनाव में भी टिकट बांटने में ’फ्री हैंड ’रहेगी।

पूरी बाजी पलट कर चमकते चेहरे के साथ भाजपाई अभेद्य किले से बाहर आई राजे ने एक सवाल के जवाब में सही कहा “रिजल्ट सी आन माई फेस“ बट नो बडी केन रीड हर फेस।

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