आमजन के लिए आमजन द्वारा

ई नीलू दादा इतने परोपकार के काम काहे करते है ! मालूम है ?

निष्काम कर्म से जुड़ रहे है प्रवासी युवा, प्रवासी परिवारों सहित गांव के लोगों भी कर रहे है मदद

799
एम्बुलेंस बाइक में बैठे निलेश सिंघवी, बाइक चलाते बबलू जैन एवं साथ खड़े अन्य लोग
  • लखन सालवी

गोगुन्दा/उदयपुर – युवाओं को निष्काम कर्म की ओर अग्रसर होना चाहिए, हर व्यक्ति अपने जीवन में मानव सेवा की प्रेरणा लेकर निष्काम कर्म करे तो दुःखियों, पीड़ितों व जरूरतमंदों को सहारा मिल सकता है। ये कहना है सकारात्मक ऊर्जा के धनी युवा व प्रवासी राजस्थानी निलेश सिंघवी का।

निलेश सिंघवी गोगुन्दा उपखण्ड के नान्देशमां गांव के मूल निवासी है तथा बरसों से गुजरात के सूरत शहर में व्यवसाय कर रहे है। सिंघवी जनहित के कार्यों में सहयोग के लिए सोशल मीडिया पर अपील करते है और कुछ ही समय में उनके मित्रों का सहयोग मिल जाता है। हाल ही में उनके निष्काम कर्म की बदौलत नान्देशमा गांव में बाइक एम्बुलेंस पहुंची है। जिससे आकस्मिक मामलों के अलावा जरूरमंद मरीजों को बाइक एम्बुलेंस द्वारा अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। सिंघवी ने गुजरात के सूरत में यह बाइक एम्बुलेंस इजाद कर नान्देशमा पहुंचाई है।

बाइक एम्बुलेंस में वृद्धजन को हॉस्पीटल से घर छोड़ने जाते बबलू जैन

खराब रास्तों के कारण नहीं पहुंच पाती सरकारी एम्बुलेंस, बाइक एम्बुलेंस जा सकती है ठेठ घर

सिंघवी ने बताया कि नान्देशमा ग्राम पंचायत क्षेत्र के भीम जी गुढ़ा गांव में  ने के लिए सड़क नहीं है। रास्ता ठीक नहीं होने के कारण एम्बुलेंस वहां नहीं पहुंच पाती है। ऐसे कई छोटे फले व गांव है, जहां के लोगों को इस समस्या से दो-चार होना पड़ता है।

बाइक एम्बुलेंस के बारे में पहले सुन रखा था तो यहां बाइक एम्बुलेंस व्यवस्था करने में जुट गए। कई जगहों पर सम्पर्क करने के बाद बाइक एम्बुलेंस तैयार करने वाला मिल गया। स्वयं ने बाइक खरीदी और कार्ट बनवाकर बाइक के साथ लगवाया। एक लाख 15 हजार रूपए में तैयार हुई बाइक एम्बुलेंस में फर्स्ट ऐड किट तथा फोल्डिंग स्ट्रेक्चर हर समय साथ रहेगा। बाइक में साइरन भी लगाया गया है।

गीता की पुस्तक पढ़कर मिली थी प्रेरणा

सिंघवी ने बताया कि 2010 में उनकी पत्नी लीना सिंघवी को केंसर हो गया था। उपचार के दौरान कई दिनों तक अस्पताल में आना-जाना पड़ा था। तब आध्यमिक शक्ति के लिए बाजार से गीता की पुस्तक खरीद कर पढ़ी तो निष्काम कर्म की प्रेरणा मिली। उन्होंने बताया कि उसके बाद से वे व्यवसाय के साथ-साथ मानव सेवा के कार्य भी कर रहे है।

शुरूआत के कुछ सालों तक अकेले ही स्कूली बच्चों को कपड़े, स्वेटर वितरण करने, अस्पतालों में फल वितरण करने जैसे जनहित के कार्य करते रहे।

 

 

सूरत में परिन्दों के लिए पानी के परिण्ड़े वितरण करते हुए

सोशल मीडिया से फैला निष्काम कर्म का दायरा वहीं जुड़े समान सोच के युवा

सिंघवी ने बताया कि पहले वो अकेले की जनहित के कार्यों में लगे रहते थे लेकिन सोशल मीडिया आने के बाद निष्काम कर्म का दायरा भी बढ़ा और निष्काम कर्म के प्रति अन्य लोगों का भी जुड़ाव हुआ। सूरत में सेहरा प्रांत (गोगुन्दा-सायरा) के प्रवासी राजस्थानी युवाओं का एक ग्रुप बना हुआ है सुपर-6। यह ग्रुप केवल क्रिकेट प्रतियोगिता करवाता है। प्रतियोगिता के आयोजन के बाद बची हुई राशि का उपयोग पक्षियों के लिए परिण्ड़े लगाने, असहायों की सहायता करने जैसे कार्य किए जाते थे। सिंघवी ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए सोशल मीडिया को अपील का जरिया बनाया। जब लोगों का जुड़ाव होता गया तो निष्काम कर्म फाउण्डेशन बना लिया। निष्काम कर्म की सोच वाले कई युवा इससे जुड़े। वर्तमान में विजय भादविया, शैतान सिंह चुण्ड़ावत, धर्मेश मादरेचा, दिलीप भोगर, बबलू जैन, महावीर मेहता, जयंती परमार, हेमंत परमार, जौली मिश्रा, प्यारचन्द लौहार व रोहित धोका जैसे दर्जनों युवा इस अभियान में साथ जुड़े हुए है।

फाउण्डेशन ने अब तक किए है ये काम

निष्काम कर्म फाउण्डेशन के द्वारा दो वर्ष में एक बार सूरत में महिलाओं के लिए प्री-केंसर चैकअप कैंप लगाए जा रहे है। जिनमें 1000 प्रवासी महिलाओं का चैकअप के दौरान 6 महिलाओं में केंसर के लक्षण पाए गए जिनका समय पर उपचार हो पाया।

  • शौर्य अतुल द्विवेदी

    विगत दो सालों से सूरत शहर में पक्षियों के पीने के पानी के लिए 3000 परिण्ड़े वितरित किए जा रहे है।

  • नैत्र चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 61 मरीजों के ऑपरेशन किए गए।
  • जरूरतमंद बच्चों को नए कपड़े, ठिठुरन से बचाने के लिए स्वेटर तथा जूते आदि भी वितरित किए गए है।
  • सूरत में बालक शौर्य अतुल द्विवेदी बूरी तरह से जल गया था। उसके उपचार के लिए परिजनों के पास पर्याप्त राशि नहीं थी। निष्काम कर्म से जुड़े युवाओं ने मिलकर अतुल का उपचार करने का बीड़ा उठाया। निलेश सिंघवी ने सोशल मीडिया पर अपील की, जिससे मदद के लिए कई हाथ आगे बढ़े और अतुल का उपचार हो पाया।
  • वहीं प्रवासी परिवार के बेटे सुरेन्द्र सिंह के वॉल्व खराब हो गए थे, डॉक्टरों ने वॉल्व बदलने की बात कही तो परिजनों के होश उड़ गए। सिंघवी को जानकारी मिली तो उन्होंने सोशल मीडिया पर अपील की। अपील के बाद मदद के लिए कई हाथ आगे आए। उनके सहयोग से सुरेन्द्र सिंह के वॉल्व बदल दिया गया।
परिवार के साथ निलेश सिंघवी

हर युवा को पीड़ितों और जरूरतमंदों के सहयोग के लिए आगे आना चाहिए – सिंघवी
“मेरे अकेले से कुछ नहीं हो सकता है। मैं केवल सोशल मीडिया पर अपील करता हूं, कहीं-कहीं व्यक्तिगत सहयोग करता हूं। हां समान सोच के युवा साथियों के जुड़ने के कारण कई निष्काम कर्म हम कर पा रहे है। देश के हर युवा, हर व्यक्ति को पीड़ित व जरूरतमंद के सहयोग के लिए आगे आना चाहिए और अपने-अपने स्तर प्रयास करने चाहिए।” – निलेश सिंघवी, प्रवासी – राजस्थानी – सूरत

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com