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सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी ऐक्ट पर नहीं बदला फैसला तो अध्यादेश लाएगी सरकार?

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नई दिल्ली – एससी-एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट अगर अपने फैसले को नहीं बदलेगी तो केंद्र की मोदी सरकार इस पर अध्यादेश ला सकती है। सूत्रों के मुताबिक विपक्ष के हमले झेल रही सरकार इस मामले में अध्यादेश लाने पर विचार कर रही है। कहा जा रहा है कि दलितों पर कथित अत्याचार के खिलाफ विपक्षी विरोध को कुंद करने के लिए पीएम मोदी यह दांव चल सकते हैं। बीएसपी चीफ मायावती ने भी केंद्र से अध्यादेश लाने की अपील की है।

मोदी देश की दलित आबादी को यह आश्वत करना चाहते हैं कि उनकी सरकार दलित समुदाय के खिलाफ नहीं है। कांग्रेस ने एससी-एसटी ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार को जमकर घेरा था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कई ट्वीट कर पीएम मोदी पर सीधे निशाना साधा था।

माया बोलीं, सरकार लाए अध्यादेश
बीएसपी चीफ मायावती ने कहा कि अगर वाकई केंद्र सरकार को दलितों से हमदर्दी है तो उसे एससी-एसटी ऐक्ट पर अध्यादेश लाना चाहिए। उन्‍होंने कहा, ‘मैं मोदी जी से कहना चाहती हूं कि अगर आपकी नीयत साफ है तो आपको कोर्ट के फैसले का इंतजार करने की बजाय एससी-एसटी ऐक्‍ट को प्रभावी बनाने के लिए कैबिनेट की बैठक बुलाकर अध्‍यादेश जारी करना चाहिए। सरकार ने इस ऐक्‍ट को प्रभावी बनाने के लिए अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अध्‍यादेश जारी कर दिया होता तो दलितों को भारत बंद नहीं करना पड़ता।’

पासवान ने दिए अध्यादेश के संकेत
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी शुक्रवार को संकेत दिए थे कि अगर जरूरत पड़ी तो एससी-एसटी ऐक्ट को मजबूत करने के लिए सरकार अध्यादेश ला सकती है। पासवान ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र द्वारा दाखिल पुनर्विचार याचिका पर ऐक्ट में राहत देगी। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल पुनर्विचार याचिका में सरकार ने साफ तौर पर कहा कि इस मामले में शीर्ष अदालत के फैसले से पैदा भ्रम को जजमेंट पर पुनर्विचार कर या फिर निर्णय को वापस लेकर खत्म किया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि अगर शीर्ष अदालत सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर देती है तो ऐसे में केंद्र सरकार अध्यादेश का सहारा ले सकती है।

क्या था सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एससी/एसटी ऐक्ट में तत्काल गिरफ्तारी न किए जाने का आदेश दिया था। इसके अलावा एससी/एसटी ऐक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत को भी मंजूरी दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा था कि इस कानून के तहत दर्ज मामलों में ऑटोमेटिक गिरफ्तारी की बजाय पुलिस को 7 दिन के भीतर जांच करनी चाहिए और फिर आगे ऐक्शन लेना चाहिए। यही नहीं शीर्ष अदालत ने कहा था कि सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी अपॉइंटिंग अथॉरिटी की मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती। गैर-सरकारी कर्मी की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी की मंजूरी जरूरी होगी।

गौरतलब है कि एससी-एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कुछ दिन पहले देशभर में दलित संगठनों ने बंद आयोजित किया था। बंद के दौरान कई राज्यों में हिंसा हुई थी और 8 लोग मारे भी गए थे।

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