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शाहपुरा से जिस पार्टी का प्रत्याशी चुनाव जीतता है, सूबे की सरकार उसी पार्टी की बनती है !

दावेदारी करने आगे आए है शाहपुरा के युवा, बुजुर्ग नहीं छोड़ रहे सत्ता का लालच

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लखन सालवी

जी हां, शीर्षक में जो लिखा है वो शत प्रतिशत सही है। भीलवाड़ा जिले की आरक्षित सीट शाहपुरा से जिस पार्टी का प्रत्याशी चुनाव जीतता है, राज्य में सरकार उसी पार्टी की बनती है।

1972 में यहां कांग्रेस के प्रत्याशी भूरा लाल ने 15039 मतों से चुनाव जीता, वहीं राज्य में 145 सीटें लाकर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी साबित हुई और सरकार बनाई –

1977 में भाजपा प्रत्याशी भैरू लाल बैरवा ने जीत हासिल की, वहीं 152 सीटों के साथ भाजपा ने सरकार बनाई।

1980 में कांग्रेस के देबी लाल बैरवा जीते और कांग्रेस ने 133 सीटें हासिल कर सरकार बनाई।

1985 में कांग्रेस के देबी लाल बैरवा पुनः जीते, तब कांग्रेस ने 113 सीटों के साथ सरकार बनाई।

1990 में भाजपा के भैरू लाल बैरवा जीते और 135 सीटें प्राप्त कर भाजपा ने सरकार बनाई।

1993 में भाजपा के कैलाश मेघवाल जीते वहीं 95 सीटों से भाजपा ने सरकार बनाई।

1998 में कांग्रेस के देबी लाल बैरवा चुनाव जीते और 153 सीटों के साथ कांग्रेस ने सरकार बनाई।

2003 में भाजपा के रामरतन बैरवा 279 मतों से चुनाव जीते और 120 सीटें वाली भाजपा ने सरकार बनाई।

2008 में कांग्रेस के महावीर प्रसाद जीनगर चुनाव जीते और कांग्रेस ने 96 सीटों पाकर सरकार बनाई।

2013 में भाजपा के कैलाश मेघवाल चुनाव जीता और 163 सीटों के साथ भाजपा सत्ता में आई।

तो यह ट्रेंड रहा है शाहपुरा विधानसभा सीट का। कयास लगाए जा रहे है कि इस बार भी जिस पार्टी का उम्मीदवार चुनाव जीतेगा, सूबे में सरकार उसी पार्टी की बनेगी।

काबिले गौर है कि 1993 के बाद से राजस्थान में एक बार कांग्रेस व दूसरी बार भाजपा सत्ता में आ रही है। ऐसे में इस ट्रेण्ड को तोड़ने के लिए भाजपा ने पूरी तरह कमर कस ली है। यहां कांग्रेस व भाजपा दोनों ही बड़ी पार्टियां टिकट वितरण करने को लेकर सर्तक है। आइए नजर डालते है यहां कौन-कौन है टिकट के दावेदार –

तो दावेदारों की सूची आपने देखी। इन दावेदारों में से ज्यादातर युवा है।

राजस्थान में 7 दिसम्बर को विधानसभा चुनाव होने वाले है। वर्तमान में आचार संहिता लगी हुई है, सभी राजनीतिक दलों की टिकट चयन समितियां प्रत्याशियों का चयन करने में लगी हुई है। जिन लोगों ने चुनाव लड़ने का मानस बना रखा है वे अपने बायोडेटा प्रत्याशी चयन समितियों के सदस्यों, पार्टी पदाधिकारियों व आलाकमान तक पहुंचाने के लिए ना-ना प्रकार के जतन कर रहे है। इस बीच राहत प्रदान करने वाली बात यही है कि इस बार भारी संख्या युवा चुनाव लड़ने के लिए आगे आ रहे है। इसकी बानगी भीलवाड़ा जिले की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट शाहपुरा में देखने को मिल रही है।

Kailash Meghwal

भाजपा के वयोवृद्ध नेता कैलाश मेघवाल ने एक बार फिर से चुनाव लड़कर समाज सेवा करने की घोषणा करने से भाजपा से टिकट की मांग कर रहे युवाओं के पैर डिगा दिए है। यहां भाजपा से कैलाश मेघवाल प्रबल दावेदार माने जा रहे है। उनके बाद दूसरे पायदान पर बनेड़ा पंचायत समिति के प्रधान राजमल खींची खड़े पाये जा रहे है। वहीं भाजपा के रामदेव बैरवा, अविनाश जीनगर, वेदप्रकाश खटीक, महादेव रेगर सहित कई लोग टिकट मांगने की कतार में है। विधानसभा क्षेत्र में कैलाश मेघवाल के खिलाफ एंटीइनकंबेंसी का माहौल है हालांकि उनके टिकट कटने की संभावना बहुत ही कम प्रतीत होती है लेकिन बनेड़ा प्रधान राजमल खींची का वर्चस्व व पकड़ अधिक दिखलाई पड़ रही है।

 

Rajmal Khinchi

आपको बता दे कि गत विधानसभा चुनाव में भी राजमल खींची ने दावेदारी जताई थी लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया। उसके बाद खींची ने पंचायतीराज चुनाव में बनेड़ा के वार्ड संख्या 5 से सामान्य सीट पर चुनाव लड़कर पंचायत समिति सदस्य के रूप में जीत हासिल की और बाद प्रधान निर्वाचित हुए। बनेड़ा के पूर्व उपप्रधान गजराज सिंह राणावत सहित मण्डलों पदाधिकारियों, सदस्यों, ग्राम पंचायत के सरपंचों सहित विभिन्न समुदायों के कई लोगों का झुकाव खींची की ओर है। हालांकि सभी का साफ कहना है कि वे पार्टी जिसे टिकट देगी उसके साथ रहेंगे। वहीं 40 वर्षीय युवा राजमल खींची बनेड़ा प्रकोष्ठ के एससी प्रकोष्ठ के मंडल के निरन्तर दो बार अध्यक्ष रहे है। चमनपुरा ग्राम पंचायत के उपसरपंच रह चुके है तथा कई सामाजिक कार्यों में सक्रिय है। वे पंचायतीराज प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रतिनिधि है तथा बनेड़ा मण्डल के अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे। उनका कहना है कि अगर पार्टी टिकट देती है तो वे जरूर चुनाव लडेंगे।

Gopal Keshawat

कांग्रेस से प्रबल दावेदारी विमुक्त, घुमन्तु व अर्द्धघुमन्तु कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष गोपाल केसावत की नजर आ रही है। उच्च शिक्षित युवा गोपाल केसावत द्वारा विगत वर्षों में विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के लिए किए गए कार्यों, पार्टी पदाधिकारियों से सम्पर्क व संगठन में सक्रियता को देखते हुए इनकी दावेदारी प्रबल लगती है।

पार्टी ने जिस प्रकार केसावत को हनुमानगढ़ नगर परिषद चुनाव का प्रभारी बनाया, 2017 में गुजरात चुनाव में विधानसभा पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी, उससे कयास लगाए जा रहे है कि टिकट केसावत को ही मिलेगा। हालांकि कांग्रेस से पूर्व प्रत्याशी राजकुमार बैरवा, पूर्व विधायक महावीर मोची तथा गोपाल बलाई जैसे कई लोग भी दावेदारी जता रहे है।

Debi Lal Meghwanshi

लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों का मानना है कि चुनाव लड़ने के लिए युवाओं का आगे आना हर्षित करता है। दोनों ही पार्टियों के युवा मजबूती के साथ दावेदारी कर रहे है। इस सीट से युवा गौसेवक देबी लाल मेघवंशी भी चुनाव लड़ने का आतुर है। हाल ही में हनुमान बेनीवाल ने उन्हें अपने समर्थकों सहित जयपुर की सभा में आमंत्रित किया है।

क्षेत्र में वर्तमान विधायक से अंसतुष्टों की संख्या, राजस्थान सरकार के प्रति जनता का रोष और जनता की मांगों को देखते हुए कांग्रेस की जीत की संभावना तो बन रही है मगर गुटबाजी से उपर उठकर स्थानीय व जीताऊ उम्मीदवार को मौका देने पर ही यह संभव हो पाएगा।

सक्रिय राजनीति में युवाओं का आगे आना बदलाव की उम्मीद जगा रहा है लेकिन देखना होगा कि राजनीतिक पार्टियां युवाओं को राजनीति में आने अवसर प्रदान करती है या उन्हीं वयोवृद्ध नेताओं को टिकट देकर उनके वर्चस्व को बनाए रखने में सहयोग करती है।

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