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राजस्थान की राजनीति में ताकत से साथ उभर रहा है ये युवा नेता

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जयपुर  – राजस्थान की धरती बड़े कद्दावर नेताओं की जन्मभूमि और कर्मस्थली रही है। यहां के अनेक नेताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। इस श्रंखला में पिछले कुछ वर्षो में एक युवा नेता का उदय होते देखा जा सकता है, जिनका नाम है- गोपाल केसावत।

भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर तहसील के छोटे से गाँव में साधारण घुमंतू परिवार में जन्मे गोपाल केसावत ने न केवल राजस्थान, बल्कि पूरे भारत के घुमंतू समुदाय में राजनीतिक चेतना का संचार करके उन्हें मुख्यधारा में जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। इतना ही नहीं, आज वे समाज की सभी 36 कौमों के प्रति सेवा भावना रखते हुए जनहित के तमाम मुद्दों की लडाई लड रहे हैं। राजनीति में इसे गोपाल केसावत की जीवटता और जुझारूपन ही कहा जायेगा कि ऐसे परिवार में पैदा होकर, जिसका राजनीति से दूर-दूर का रिश्ता नहीं रहा, गोपाल केसावत ने अपनी मेहनत और जन संघर्ष के दम पर आज कांग्रेंस पार्टी में मुकाम हासिल किया है और सबके लोक लाडले व्यक्तिव के रूप मे एक नई पहचान बनाई है।

राजस्थान की राजनीति में यह गोपाल केसावत का ही योगदान है कि उन्होंने सामाजिक-राजनीतिक व्यवस्था से बहिस्कृत घुमंतू समुदाय को एकजुट करके पहले उनमें सामाजिक – राजनीतिक चेतना का संचार किया, फिर उनके लिए राजनैतिक प्रतिनिधित्व की लडाई लडकर प्रदेश कांग्रेस पार्टी में डीएनटी प्रकोष्ट का गठन करवाया और सबसे महत्वपूर्ण राज्य सरकार में डीएनटी बोर्ड का गठन करवाकर घुमंतू समुदाय की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करवाई। जनहित में किये कार्यों और संघर्ष के कारण अशोक गहलोत सरकार में गोपाल केसावत को सबसे कम उम्र में राजस्थान सरकार में गठित डीएनटी बोर्ड का संस्थापक अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) बनाया गया। इसके बाद उनके नेतृत्व में डीएनटी आंदोलन पूरे देश मे करंट की तरह फैला।

आज मौजूदा भाजपा सरकार मे भी गोपाल केसावत चट्टान बनकर सरकार व भाजपा दोनों की जन विरोधी नीतियों व कार्यों के खिलाफ मुकाबला करने के लिए खडे हैं और उनके इस संघर्ष में उनके साथ प्रदेश के हर वर्ग- समुदाय का युवा, किसान, दलित, आदिवासी और पिछडा समुदाय का हर व्यक्ति एकजुटता से खडा है। यही कारण है कि भाजपा सरकार को भी गोपाल केसावत के संघर्ष के कारण जनहित में विभिन्न समूहों को राजनीतिक भागीदारी देने के लिए विवश होना पड़ा है। वरना वसुन्धरा सरकार ने चार साल से जनहित के अनेक बोर्डों को ही भंग करके पटक रखा था। केसावत भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों का जमकर विरोध कर रहे हैं, लगातार प्रदेश के कोने-कोने में घूम घूमकर हर जाति- वर्ग के वंचित लोगों में नई ऊर्जा भरकर उन्हें कांग्रेस की विचारधारा से जोड़कर उन्हें और कांग्रेस पार्टी दोनों को मजबूत कर रहें हैं, जिससे सत्ता मे बैठी भाजपा मे खौफ पैदा हो गया है। उन्होंने गांव, गरीब, किसान और मजदूरों की बात को हर मंच पर मजबूती से उठाया है। अन्याय, जुल्म और अत्याचार के खिलाफ हमेशा खड़े होकर मुकाबला किया है। यही कारण है कि आज उनके दौरो व सभाओं में सभी समुदायों के लोगों की भारी भडी उमड रही है। प्रदेश की राजनीति में भागीदारी से वंचित हर युवा आज गोपाल केसावत में अपना राजनैतिक भविष्य देख रहा है। उन्होंने पूरे प्रदेश मे हर वर्ग के युवा में कांग्रेस पार्टी और उसकी विचारधारा के प्रति जागरूकता भर दी है।

युवा लीडर गोपाल केसावत ने क्रांतिकारी बारहठ परिवार की जन्मस्थली शाहपुरा को अपनी सियासत की कर्मभूमि बनाया है। उन्होंने यहाँ के राजकीय कॉलेज से 1998 मे स्नातक की उपाधि ली और यहीं एनएसयूआई कार्यकर्ता के रूप में राजनीति का पहला कदम भी रखा था। प्रारंभ में केसावत के जीवन का लक्ष्य प्रशासनिक सेवाओ मे जाकर समाज सेवा करने का था। लेकिन जल्द ही उन्होने अनुभव किया कि प्रशासन को तो राजनीति ही दिशा देती है, तो उन्होंने प्रशासनिक सेवा की तैयारी छोड़कर राजनीति में जाकर समाज सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। गोपाल केसावत का मानना है कि “एक प्रशासनिक अधिकारी से अधिक एक लीडर लाखों लोगो का भविष्य संवार सकता है। इसीलिए वे राजनीति में आयें हैं।“ इसी सोच के साथ वे लम्बे समय से शाहपुरा – बनेड़ा विधानसभा क्षेत्र में सभी 36 कौमों की आवाज बनकर जनहित के मुद्दों को बखूबी उठा रहे हैं, चाहे किसानों का मुद्दा हो या युवाओ के रोजगार का मुद्दा हो, पानी-बिजली- सड़क, महगाई या सुरक्षा का मुद्दा हो, केसावत जनहित के हर मुद्दे को काग्रेंस पार्टी के बैनर तले उठाकर मुखर आवाज दे रहे हैं। इतना ही नहीं, वे जनहित के मुद्दों पर स्थानीय विधायक को खुले मंच पर संवाद करने की चुनौती देकर स्वस्थ्य लोकतान्त्रिक राजनीतिक परंपरा को भी स्थापित करने की पहल कर रहे हैं। गोपाल केसावत शाहपुरा – बनेड़ा विधान सभा क्षेत्र के भविष्य का रोड़ मैप प्रस्तुत करते हुए शाहपुरा को जिला बनाने की जन मांग को मजबूती दे रहे हैं। उनके राजनीतिक एजेंडे में सभी समुदायों का समग्र व समावेशी विकाश की धारणा है। इसलिए उनकी भविष्य की राजनीति के एजेंडे में शाहपुरा को रेल नेटवर्क से जोड़ना, खेल प्रतिभाओं के लिए आधुनिक स्टेडियम का निर्माण, बाईपास का निर्माण, समेलिया को औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करना, ढीकोला उप तहसील सर्किल में ढीकोला पुलिस चौकी को थाने के रूप में क्रमोन्नत करवाना, प्रसिद्द चलानिया भैरूनाथ स्थान पर पुलिस चौकी स्थापित करना इत्यादि मुद्दे प्रमुख हैं।

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