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पंचायतों में पेयजल बचाने की मुहिम चलाने की जरूरत : बीडी कल्ला

महिला जनप्रतिनिधियों एवं किशोरी बालिकाओं ने किया संवाद

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बाल विवाह के खिलाफ किशोरियां कर रही हैं समाज को जागरूक

जयपुर – प्रदेश में बढ़ते पेयजल संकट को लेकर हमारी सरकार काफी चिंतित है। हर घर तक पानी पहुंचाना हमारी सरकार की जिम्मेदारी है पर पानी पहुंचाने के साथ ही पानी बचाना भी उतना ही जरूरी है इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी है कि पानी का दुरुपयोग नहीं हो। यह बात आज जलदाय मंत्री बीडी कल्ला ने कही। वे द हंगर प्रोजेक्ट राजस्थान की ओर से जयपुर में आयोजित महिला जनप्रतिनिधियों एवं किशोरी बालिकाओं के साथ संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने मौजूदा पेयजल संकट को देखते हुए पानी को दोबारा उपयोगी बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित महिला जनप्रतिनिधियों एवं किशोरी बालिकाओं को संकल्प दिलाया कि वे सब मिलकर अपनी-अपनी पंचायतों में पेयजल बचाने की मुहिम चलाए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में पानी को बहुत ही अमूल्य माना जाता है। यहां अक्सर कहा जाता है कि पीने के लिए दूध एवं घी मिल जाएगा पर पानी नहीं मिलता। आज बाड़मेर में 2 लाख के करीब टांकों का निर्माण हुआ है जो एक अनुकरणीय कार्य है। जलदाय मंत्री ने महिला पंच-सरपंचों से आह्मवान किया कि अपनी-अपनी पंचायतों में नरेगा के तहत टांकों का निर्माण करवाएं ताकि पेयजल संकट से कुछ हद तक निजात मिल सकें। आज हमें जल संरक्षण करने की आवष्यकता है। उन्होंने बारिश के पानी को बचाने का भी आह्मवान किया।

इस संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के सिरोही जिले के रेवदर व भीलवाड़ा जिले के सहाड़ा ब्लॉक से 24 किशोरियों व 8 महिला पंच-सरपंचों ने भाग लिया। सभी ने अपने-अपने अनुभवों को साझा किया। इस संवाद कार्यक्रम में उन किशोरियां ने भागीदरी निभाई जिन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर अपनी-अपनी पंचायतों में किशोरियों का समूह बनाकर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। बाल विवाह के खिलाफ भी इन किशोरियों ने अपने परिजनों का सामना करते हुए उनकी खिलाफत की है। बाल विवाह के खिलाफ जनजागृति का काम कर रही हैं। स्कूल में लड़कियों के लिए खेल का मैदान, महिला स्पोर्टस टीचर, स्कूल में आत्मरक्षा के कोर्स, अस्पताल में स्टाफ की कमी सहित कई मुद्दे हैं जिन्हें ये किशोरियां अपनी- अपनी पंचायतों में उठा रही है। इन किशोरियों ने अपने गांव में दारू का ठेका बंद करवाने के लिए भी आवाज उठाई है।

सिरोही जिले के सेलवाड़ा गांव की 18 साल की गोमती ने कहा कि उसकी शादी आटा-साटा प्रथा के चलते उसके चाचा के एवज में तय कर दी गई थी। ससुराल वालों ने शादी का दबाव डाला। समाज के पंचों को इकट्ठा किया। पर मैंने भी कह दिया कि मैं अपनी पढ़ाई करूंगी। पंचों ने जुर्माना लगाने का फरमान सुनाया। मैंने भी अपना फैसला सुनाया कि न तो मैं कोई जुर्माना दूंगी और ना ही आप मुझे समाज से बाहर कर सकते हो। अगर आप ऐसा करोगे तो मैं आप लोगां के खिलाफ कानून का सहारा लूंगी। ‘‘ गोमती की इस हिम्मत के सामने जाति पंच डर गए और कहा आपके घर का मामला आप ही सलटो। सेलवाड़ा की इंद्रा ने भी अपने बाल विवाह का विरोध किया। उसकी इस हिम्मत के लिए उपखंड अधिकारी की ओर से सम्मानित किया गया। सिरोही जिले की सेलवाड़ा पंचायत की काजल ने कहा कि हमारे गांव में लड़कियों के लिए खेल का मैदान नहीं था। हमने इस समस्या के बारे में अपने महिला सरपंच मंजू मेघवाल से बात की। सरपंच ने पुराने पंचायत भवन की मरम्मत करवाई और उसमें किषोरी संदर्भ केंद्र बनवाया। केंद्र पर कई खेलकूद के सामान भी रखवाएं। आज हम इस केंद्र में खेल पा रहे हैं।

इस संवाद कार्यक्रम में महिला जनप्रतिनिधियों ने भी भागीदारी निभाई। भीलवाड़ा जिले के सहाड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सरगांव की सरपंच कविता कंवर ने बताया कि लक्ष्मीपुरा गांव में स्कूल के रास्ते में नाला था। इस कारण लड़कियों को स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती थी। किशोरियों ने मिलकर नाले के निर्माण करवाने के लिए आवाज उठाई। हम सब के सामूहिक प्रयासों की वजह से आज यहां नाले का निर्माण हो पाया। सिरोही जिले के रेवदर ब्लॉक की सेलवाडा पंचायत की सरपंच मंजू मेघवाल ने ओपन से परीक्षा देने वालों के लिए क्लास की मांग को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया है।

संवाद कार्यक्रम में इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान के उपनिदेषक डॉ. आकाशदीप अरोड़ा ने कहा कि हम सब की ये सामूहिक जिम्मेदारी है कि पंचायतीराज व्यवस्था को हम मजबूत करें। उन्होंने कहा कि आज हम सब को ये संकल्प लेना होगा कि हम ग्राम सभा और महिला सभा को सशक्त बनाएंगे। प्रथम संस्था से जुड़े राजेश गुर्जर व रामकृष्ण चौधरी ने ड्राप आउट किशोरियों के लिए फिर से शिक्षा से जुड़कर अपनी शिक्षा प्राप्त करने की प्रक्रिया बताई। कहा कि आप ओपन के माध्यम से अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं।
द हंगर प्रोजक्ट के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी सुश्री कनिका काल ने बताया कि द हंगर प्रोजेक्ट राजस्थान महिला जनप्रतिनिधियों के सशक्तीकरण हेतु गत 19 वर्षों से कार्यरत है। पंचायतों में महिला जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में गर्वनेंस फ्रेमवर्क के अंतर्गत किशोरी बालिकाओं के सशक्तीकरण का कार्य राजस्थान के 2 जिलों के 3 ब्लॉक की 30 ग्राम पंचायतों में किया जा रहा है जिसके तहत बाल-विवाह से प्रभावित, स्कूल से ड्राप आउट एवं स्कूल जाने वाली किषोरी बालिकाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, कौशल विकास की जानकारी प्रदान की जाती है।

द हंगर प्रोजक्ट के कार्यक्रम अधिकारी विरेंद्र श्रीमाली ने बताया कि 27 जून को पंचायतीराज मंत्री, शिक्षा मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, युवा एवं खेल मंत्री तथा महिला बाल विकास मंत्री के निवास स्थान पर जाकर महिला जनप्रतिनिधि एवं किशोरियां नीतिगत मुद्दे रखेगी।

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